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रवीश वामपंथ की आवाज़ है।

रवीश का ये आंदोलन अपने तरह का आंदोलन है जो हिडन पालिसी के तहत है लेकिन है जेएनयू और वामपंथ के समर्थन में ही। इन्हें सुधीर चौधरी के डीएनए से दिक्कत है क्योंकि डीएनए को देखने वाला एक बहुत बड़ा वर्ग तैयार हो चूका है। और डीएनए वामपंथ और राष्ट्रविरोधी तत्वों का पुरजोर विरोध कर रहा है। चाहे वो कश्मीरी पंडितों को लेकर जमीनी स्तर पर की गयी पत्रकारिता हो या कोई और मुद्दा। जेएनयू का किस्सा भी उन कश्मीर पंडितों की कहानी से जुड़ा मुद्दा ही है। सुधीर ने इस मुद्दे को बड़ी ही बारीकी से दर्शकों तक पहुँचाया है,इसलिए सुधीर चौधरी के विरोध कश्मीर की आज़ादी चाहने वालों का पहला उद्देश्य है।

रवीश ने जेएनयू से जुड़े सभी वीडियो को फ़र्ज़ी ठहरा दिया,जेएनयू का विरोध का कर रहे सभी लोगों के स्टेटमेंट को गलत बताकर उन्हें गलत और पकिस्तान ज़िंदाबाद को सही ठहरा दिया। हो सकता है बीजेपी से जुड़े लोगों ने विरोध में उन शब्दों का चयन किया जो सही नहीं थे,लेकिन ये कतई नहीं है की ऐसा होना से उमर खालिद और कन्हैया बेगुनाह साबित हो जायेंगे। आप कहते है आपकी देशभक्ति को सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं है,बताएंगे आखिरी बार देश का विरोध करने वालों का आपने कब विरोध किया था? आप देश भक्त है यह बस आपके मुँह से सुनने मिलता है,साबित करके तो आपने बस यह दिखाया है की आप पाकिस्तान के समर्थकों के बचाव के लिए किसी भी हद तक जा सकते है।

सुधीर चौधरी को छोड़ दीजिये,इस बार तो अर्णब गोस्वामी भी आपके लिए एक सभ्य और निस्पक्ष पत्रकार नहीं लगा होगा क्योंकि वो जेएनयू की गतिविधियों के खिलाफ लगातार लड़ रहा है,और ऐसा करने वाले आपकी नजरों में अच्छे तो हो ही नहीं सकते। इस केस में आपने तो असल देशभक्ति दिखने वालों को ही दोषी ठहरा दिया है,आपके पास जो मंच है आपने उसका भरपूर उपयोग किया है वामपंथ के समर्थन के लिए। और यकीन कीजिये आप लोगों के ब्रेनवाश करने में काफी हद तक कामयाब भी रहे है। अब वो दोषी नही है जिन्होंने पाकिस्तान को ज़िंदाबाद किया,बल्कि विरोध करने वाले दोषी है क्योंकि उन्होंने विरोध के लिए शब्दों का चयन गलत किया।

जिस तरह से आपका समर्थन करने वाले दूसरों को भक्त कहते फिरते है तो मुबारक हो आपने भी अपने लिए कई भक्त पैदा कर लिए है,जो आपकी हाँ में हाँ मिलाएंगे। आपकी काली नीली स्क्रीन पर आपकी आवाज़ सुनकर ही लाल सलाम..लाल सलाम चिल्लाने लगेंगे। और यकीन मानिए कांग्रेस,आप और वामपंथियों के लिए आपने काली स्क्रीन करके वो कर दिया है जो पिछले 15 दिनों से ये सब मिलकर नहीं कर पा रहे थे,शायद इसलिए इन सबने मिलकर आपका सहारा लिया। उम्मीद है आप इसी तरह इन्हें मजबूत करते रहेंगे बस मेहरवानी कीजिये देशभक्ति और देशहित जैसे शब्दों का इस्तेमाल मत कीजिये। आप सबसे जायदा डरे हुए है रवीश,क्योंकि देश को तोड़ने वालों के खिलाफ देश एक जुट हो रहा है।

संजय सेन सागर

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