Tuesday, March 24, 2015

Chetan Anand @ Ghazal Kumbh 2015



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Wednesday, March 11, 2015

महाराजा जयसिंह और रोल्स रॉयस

इंगलैण्ड की राजधानी लंदन में यात्रा के दौरान एक शाम महाराजा जयसिंह सादे कपड़ों में बॉन्ड स्ट्रीट में घूमने के लिए निकले और वहां उन्होने रोल्स रॉयस कम्पनी का भव्य शो रूम देखा और मोटर कार का भाव जानने के लिए अंदर चले गए। शॉ रूम के अंग्रेज मैनेजर ने उन्हें “कंगाल भारत” का सामान्य नागरिक समझ कर वापस भेज दिया। शोरूम के सेल्समैन ने भी उन्हें बहुत अपमानित किया, बस उन्हें “गेट आऊट” कहने के अलावा अपमान करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी। अपमानित महाराजा जयसिंह वापस होटल पर आए और रोल्स रॉयस के उसी शोरूम पर फोन लगवाया और संदेशा कहलवाया कि अलवर के महाराजा कुछ मोटर कार खरीदने चाहते हैं।
कुछ देर बाद जब महाराजा रजवाड़ी पोशाक में और अपने पूरे दबदबे के साथ शोरूम पर पहुंचे तब तक शोरूम में उनके स्वागत में “रेड कार्पेट” बिछ चुका था। वही अंग्रेज मैनेजर और सेल्समेन्स उनके सामने नतमस्तक खड़े थे। महाराजा ने उस समय शोरूम में पड़ी सभी छ: कारों को खरीदकर, कारों की कीमत के साथ उन्हें भारत पहुँचाने के खर्च का भुगतान कर दिया।
भारत पहुँच कर महाराजा जयसिंह ने सभी छ: कारों को अलवर नगरपालिका को दे दी और आदेश दिया कि हर कार का उपयोग (उस समय के दौरान 8320 वर्ग कि.मी) अलवर राज्य में कचरा उठाने के लिए किया जाए।
विश्व की अव्वल नंबर मानी जाने वाली सुपर क्लास रोल्स रॉयस कार नगरपालिका के लिए कचरागाड़ी के रूप में उपयोग लिए जाने के समाचार पूरी दुनिया में फैल गया और रोल्स रॉयस की इज्जत तार-तार हुई। युरोप-अमरीका में कोई अमीर व्यक्ति अगर ये कहता “मेरे पास रोल्स रॉयस कार” है तो सामने वाला पूछता “कौनसी?” वही जो भारत में कचरा उठाने के काम आती है! वही? बदनामी के कारण और कारों की बिक्री में एकदम कमी आने से रोल्स रॉयस कम्पनी के मालिकों को बहुत नुकसान होने लगा।
महाराज जयसिंह को उन्होने क्षमा मांगते हुए टेलिग्राम भेजे और अनुरोध किया कि रोल्स रॉयस कारों से कचरा उठवाना बन्द करवावें। माफी पत्र लिखने के साथ ही छ: और मोटर कार बिना मूल्य देने के लिए भी तैयार हो गए। महाराजा जयसिंह जी को जब पक्का विश्वास हो गया कि अंग्रेजों को वाजिब बोधपाठ मिल गया है तो महाराजा ने उन कारों से कचरा उठवाना बन्द करवाया

Tuesday, February 10, 2015

हीरों की चोरी

आमतौर पे जब भी ये बात होती है की अंग्रेजों ने किस सबसे कीमती हीरे या रत्न को अपने देश से चुराया है तो सबके ज़बान पे एक ही नाम होता है- कोहिनूर हीरा.जबकि कितने ही ऐसे हीरे और अनोखे रत्न हैं जो बेशकीमती हैं और जिन्हें विदेशी शाशकों और व्यापारी यहाँ से किसी न किसी तरह से ले जाने में सफल रहे.कितने तो ऐसे हीरे और रत्न हैं जो हमारे देश के विभिन्न मंदिरों से चुराए गए...इस पोस्ट में देखिये कुछ ऐसे दुर्लभ,अनोखे और अदभुत हीरे,जो हमारे देश में पाए गए लेकिन अब अलग अलग मुल्कों में हैं या फिर कहीं गुमनाम हो गए हैं.


कोहिनूर


कोहिनूर के बारे में किसे नहीं पता, हर भारतीय को शायद ये मालुम होगा की यह बहुमूल्य हीरा फिलहाल ब्रिटिश महारानी के ताज की शोभा बढ़ा रहा है.105 कैरट  का कोहिनूर एक दुर्लभ हीरा है और यह हीरा आंध्र प्रदेश के गोलकुंडा खान में मिला था.गोलकुंडा खान बहुत समय तक(जब तक ब्राजील में हीरों की खोज नहीं हुई थी)विश्व में हीरों का एक मात्र श्रोत था.कोहिनूर हीरा कई राजा महराजाओं के पास से होता हुआ अंततः महाराज रंजीत सिंह के पास पंहुचा.महराज रंजीत सिंह की मरते वक्त ये आखरी ईच्छा(उनके वसीयत में भी इस बात का जिक्र था) थी की कोहिनूर हीरे को पूरी के जग्गनाथ मंदिर में दान कर दिया जाए.उस वक्त अँगरेज़ शाशक भी ये बात मान गए, लेकिन फिर बाद में धोके से कोहिनूर अपने साथ लेते गए.


नूर-उल-आयन हीरा


कोहिनूर के जैसे ही यह हीरा भी गोलकोंडा के खानों में पाया गया था.नादिर शाह ने जब अठारवीं सदी में दिल्ली पे हमला किया तो उसने देश भर में दिल्ली के साथ साथ कई जगह लूटपाट की, और इसी दौरान उसके हाथ लगा नूर-उल-आयन हीरा.यह विश्व का सबसे बड़ा "गुलाबी हीरा" है.कहा जाता है की यह हीरा और भी बड़ा होता, लेकिन इसके दो टुकड़े कर दिए गए थे.पहला टुकड़ा तो नूर-उल-आयन के नाम से जाना गया और दूसरा टुकड़ा दरिया-ए-नूर के नाम से.नूर-उल-आयन इरानी महारानी के मुकुट में मढ़ा हुआ है, अब यह ईरानियन क्राउन ज्वेल्स का एक हिस्सा है.नूर-उल-आयन का वजन 60कैरट है.


दरिया-ए-नूर

नूर-उल-आयन के जब दो टुकड़े किये गए तो बड़ा हीरा को दरिया-ए-नूर का नाम दिया गया.इसे विश्व का सबसे बड़ा हीरा कहा जाता है.182कैरट(36gm) का यह हीरा भी गुलाबी है और बेहद दुर्लभ.इसका दूसरा नाम "सी ऑफ लाईट" भी है.यह हीरा भी ईरानियन क्राउन ज्वेल्स का एक हिस्सा है और इसे अभी सेन्ट्रल बैंक ऑफ तेहरान में रखा गया है




ग्रेट मुगल डाइमंड 

बताया जाता है की गोलकुंडा की खानों से जब यह हीरा निकला था तब इसका वजन कुछ 800कैरट था.उस समय के एक फ़्रांसिसी हीरों की व्यपारी ने इस हीरे को अदभुत और दुर्लभ बताया था.इस हीरे को भी नादिर शाह ने भारत से लुटा था.अंतिम जानकारी तक इस हीरे का वजन घट कर 280 कैरट हो चूका था.फ़िलहाल यह हीरा कहाँ है, यह किसी को पता नहीं.



नीला हीरा(Wittelsbach-Graff Diamond)

यह बहुत ही दुर्लभ पाए जाने वाला नीला हीरा भी आंध्र प्रदेश के गोलकुंडा खानों में पाया गया था.स्पेन के राजा ने इस हीरे को अपनी बेटी के शादी में बेटी के दहेज के रूप में दिया था.यह डाइमंड उन तक कैसे पहुची इसके बारे में कई जगह कई बातें लिखी गयी हैं.और भारत से यह हीरा कब और कैसे निकला बाहर इसके बारे में भी पुख्ता जानकारी फ़िलहाल नहीं है.यह हीरा अभी नेशनल म्युजिअम ऑफ नैचुरल हिस्ट्री,वाशिंगटन में प्रदर्शनी पर लगा हुआ है.

लाल हीरा(Kazanjian Diamond, Formerly known as Red Diamond)



इसके बारे में भी सही जानकारी फ़िलहाल उपलब्ध नहीं है, कहा जाता है की उन्नीसवीं सदी में ब्रिटिश भाइयों ने एक महराज(शायद सिन्ध)से यह हीरा धोके से लिया था, और तब से यह उनके पास ही है.फ़िलहाल बताया जाता है की अफ्रीकन एस्टेट म्युजिअम में यह हीरा रखा हुआ है.




द रिजेंट

140 कैरट का यह हीरा 1702 के आसपास गोलकुंडा की खान से निकला था.जिस समय यह हीरा पाया गया था खान में तब इसका वजन कुछ 410कैरट था.कई राजाओं महराजाओं,अँगरेज़ गवर्नरों के हाथ से होता हुआ यह हीरा नेपोलियन तक पहुंचा.यह हीरा नेपोलियन को इतना पसंद आया की उसने इसे अपने तलवार में जड़ दिया.यह हीरा अभी पेरिस के लेवोरे म्यूजियम में है.




ब्रोलिटी ऑफ इंडिया

कहा जाता है की यह विश्व का सबसे पुराना हीरा है.कई वर्षों तक यह हीरा गुमनाम रहा, फिर 1950 में यह हीरा सामने आया.बताया जाता है की न्युयोर्क के किसी राजा या गवर्नर ने भारत के किसी राजा से यह हीरा लिया था.फिलहाल यह हीरा इयुरोप में कहीं है.






ब्लैक ओरलोव

लगभग 18वीं शताब्दी के इस 200 कैरेट के हीरे को सालों पहले मैसूर के मंदिर की एक मूर्ति की आंख से फ्रांस के व्यापारी ने चुराया था.बताया जाता है कि आज यह हीरा रूस के रोमनोव वंश के ऐतिहासिक ताज में जड़े साढ़े आठ सौ हीरे-जवाहरातों में से एक है.इसे "आई ऑफ ब्रम्हा" भी कहा जाता है.





फ्लोरेंटाइन हीरा

इसे पीले हीरे के नाम से भी जाना जाता है.यह हीरा 138कैरट का यह हीरा दुर्लभ पीले हीरों के श्रेणी में आता है.कहा जाता है की विजयनगर के राजा से किसी पुर्तुगाली राजा ने यह हीरा चुराया था.यह हीरा कहाँ है, किसके पास है, इसके बारे में कोई जानकारी नहीं है.





द आइडल आई

70कैरट का यह हीरा भी गोलकोंडा के खानों में सोलहवीं सदी में पाया गया था.इस हीरे के बारे में भी कई तरह की कहानियां है, लेकिन सबसे पुरानी कहानी जो बतायी जाती है वो ये है की टर्की के किसी राजा ने इसे काश्मीर के किसी राजा से लिया था.





होप डाइमंड



45कैरट का अपने आप में अदभुत यह हीरा भी आंध्र प्रदेश के ही गोलकोंडा खानों में पाया गया था.कहा जाता है की माँ सीता के मूर्ति के आँख से यह हीरा चुराया गया था.फ़िलहाल यह हीरा स्मिथसोनियन संग्रहालय में है.




सांसी हीरा

56 कैरट का यह हीरा मुग़ल सम्राटों के खजाने का हिस्सा था.यह हीरा कहाँ से निकला था इसके बारे में अब भी कुछ विवाद है, लेकिन माना जाता है की इस हीरे की भी खोज गोलकुंडा के खानों में ही हुई थी.यह हीरा फिलहाल अपोलो गैलरी में रखा हुआ है.


पर्पल सैफाइअर

इस हीरे के बारे में कहा जाता है की इसे 1857 के विद्रोह के समय इंद्र के एक मंदिर से लुटा गया था.जिसने इसे चुराया था, उसके हाथों और  अन्य लोगों के पास से होते हुए यह हीरा ऑस्कर वाइल्ड के पास पहुंचा.अभी यह हीरा नेशनल हिस्ट्री म्युजिअम, लन्दन में है.इसे "द दिल्ली पर्पल सैफाइअर" भी कहा जाता है.


नजक हीरा

44कैरट का यह हीरा आंध्र प्रदेश के अमरागिरी के खानों में पाया गया था.अंग्रेजों ने मराठा युद्ध के समय इसे त्र्यम्बकेश्वर मंदिर से लुटा था.यह हीरा विश्व के ३० सबसे अनोखे और अद्दुत रत्नों में गिना जाता है.




द स्टार ऑफ इंडिया



535कैरट का यह  सैफाइअर विश्व के सबसे बड़े रत्नों में गिना जाता है.अभी यह अमेरिका म्युजियन ऑफ नेशनल हिस्ट्री,न्यू योर्क में रखा है.






ऐसे कई हीरे और भी हैं, जो हमारे देश से बाहर किसी और मुल्क में हैं.आपको ये जानकार हैरानी भी होगी की कुल 50सर्वोत्तम और अनोखे हीरों में कई हीरें हमारे देश में ही पाए गए हैं और अधिकतर गोलकोंडा के खानों में.

साभार : मेरी बातें ब्लॉग से 

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