Sunday, August 24, 2014

उत्तर प्रदेश सरकार : प्रकृति की ओर बढ़ते कदम !




                उत्तर प्रदेश सरकार पूरे प्रदेश को अनुशासित , संयमितऔर त्यागी बनाकर ही दम लेगी।  इतना ही नहीं बल्कि इसको उनके द्वारा दिए गए नाम उत्तम प्रदेश की भूमिका भी तैयार हो रही है।
                                      यहाँ  दिनचर्या शुरू करने के लिए ऋषि मुनियों  की तरह  ब्रह्म मुहूर्त में उठने की आदत डालने के लिए सुबह ४ बजे  बिजली काट दो।  अच्छे अच्छे कुम्भकरण उठ जाएंगे।  प्रकृति भी उनके साथ है न - भीषण गर्मी में आदमी उठकर बाहर आ जाएगा।  अब क्या करेंगे ? कुछ प्रातः भ्रमण की सोचेंगे , कुछ लोग योग करने की और कुछ नित्य कार्य  निवृत होने की सोचेंगे.

                                      कुछ  सबसे अलग बेड टी की बजाय गार्डन टी, गार्डन  न हुआ तो टैरेस टी और वह भी न हुआ तो घर के बाहर कुर्सी डाल  कर टी का आनंद ले रहे होते हैं ।  कोई ३ घंटे बाद के  बिजली रानी को  तरस आ गया और वह पधारी तो  सब पहले टंकी भर लो और फिर पानी के काम निबटा डालो।  बस आप सब काम करके नाश्ता करने बैठे ही थे कि फिर बिजली गोल।  अब की बार ४ घंटे के लिए उससे ज्यादा हमारी मर्जी पर नहीं  है,  इतनी कटौती के बाद भी चैन से नहीं रहने देंगे क्योंकि उन्हें पूरे प्रदेश में एक जैसा माहौल चाहिए।  एक आम आदमी कहीं  से जुगाड़ करके इन्वर्टर खरीद भी लेता  है तो भी सुख चैन कहाँ ?   इन्वर्टर  दौपदी की साड़ी की तरह तो है नहीं कि कभी ख़त्म ही न हो ? वह चार्ज  नहीं  हो पाता है।अब दिन बहुरेंगे हाथ के पंखों के - जिससे प्रदेश  कुटीर उद्योग में कुछ इजाफा होगा ,  लोगों को आमदनी का एक जरिया भी मिल जाएगा।  इससे बाद भी खेतों और मजदूरी करने वालों  दुःख दर्द को समझने का अवसर भी मिलेगा।  भाई  चारे की भावना का विकास होगा।  इससे  लोगों  ध्यान सौर ऊर्जा की और आकर्षित होगा और प्रकृति की देन का पूरा पूरा उपयोग होने संभावना बढ़ जाती है।  इससे  लोगों को कुछ और रोजगार मिलाने के अवसर निकल आएंगे।  बेकारी  और गरीबी को हटाने के लिए एक नया रास्ता मिल जाएगा।
                                    अरे दोस्तों ये तो बानगी है ,  फिर से सत्ता इनके हाथ में दीजिये आप प्रकृति की गोद में ही सोयेंगे और जंगल राज्य लागू होगा।  सब बराबर   कोई  भेदभाव नहीं।  

Friday, August 15, 2014

vimarsh: nyaypalika men sendh -sanjiv

विमर्श 
: भारतीय न्यायपालिका में राजनीति की सेंध : 
स्वतन्त्रता दिवस के हर्षोल्लास में भारत के लोकतंत्र के सर्वाधिक सदृश और विश्वासपात्र स्तंभ न्यायपालिका की नींव में राजनीती की सेंध लगाने की और लोगों का ध्यान नहीं जा पाया। 
माननीय न्यायाधीशों की नियुक्ति के संबंध में कॉलेजियन प्रणाली को समाप्त कर नयी प्रणाली को लाने के लिये बिल संसद में बिना विशेष बहस के लगभग सर्व सम्मति से पास कर दिया गया. 
भारतीय संसद में सिवाय भाटी और सुविधाएँ बढ़ाने के  दलों और नेताओं में कभी किसी बिंदु पर मतैक्य नहीं होता। न्यायिक सक्रियता के कारण सभी दलों के नेताओं को पिछले दिनों कटघरे में पहुँचाना पड़ा। जनता को हार्दिक प्रसन्नता हुई किन्तु नेताओं के मन में न्यायाधीशों के प्रति कटुता पल गयी. कॉग्रेस कसमसाती रही किन्तु न्यायपालिका को छेड़ने की हिम्मत नहीं कर सकी. 
गत आम चुनाव में बी.जे.पी. को मिले जनमत का श्रेय मोदी जी को दिए जाने और मोदी जी की दबंग व्यक्तित्व के कारण विरोधी दल राजनैतिक विरोध के दमन किये जाने को लेकर आशंकित हैं. इस कारण लालू और नीतीश जैसे धुर विरोधी भी गले मिले हैं. न्यायपालिका के प्रति खटास इतनी प्रबल है कि आपसी द्वेष भूलकर केर-बेर संग आ गए. 
नयी प्रणाली में नए न्यायाधीशों को चुनने के लिए बनायी गयी समिति में राजनैतिक लोसो का बहुमत है. न्यायाधीश अल्पमत में हैं  दबाब भी होता ही है. एक बार सत्ताधारी दल अपने समर्थक न्यायधीश बना पाया तो फिर न्यायाधीश भी उसके ही होंगे और इस तरह न्यायपालिका सत्ताधारी दल की जेब में होगी। 
यह लोकतंत्र के लिए सबसे बड़ा खतरा है. इस प्रावधान के विविध पक्षों पर विचार बिना अति शीघ्रता से बिल को पास करना शंका को पुष्ट करता है. यहाँ तह की प्रेस भी इस बिंदु पर मौन है। वर्तमान प्तमुख न्यायाधीश की राय की पूरी तरह अनदेखी भविष्य की दृश्य दिखा रही है. विरोही दलों पर जब बिजली गिरेगी वे तभी चेतेगें किन्तु पत्रकारों और वकीलों को जनमंच पर इस प्रसंग के विविध पहलू और खतरे सामने लेन चाहिए ताकि प्रबल जनमत से सरकार समिति में राजनीतिक लोगों की संख्या घटा कर न्यायपालिका और बार के सदस्य बढ़ाये ताकि सत्ताधारी दाल के लिए मनमानी करने का अवसर न रहे. 
इस महत्वपूर्ण विषय पर विविध पहलुओं से विचार जरूरी है.      
facebook: sahiyta salila / sanjiv verma 'salil' 

लो क सं घ र्ष !: राजीव यादव की सरकारी हत्या का प्रयास

आजादी के बाद से आज तक के इतिहास में पहली बार भोपाल कारागार से आठ कथित सिमी कार्यकर्ता कैदियों को निकाल कर दस किलोमीटर दूर ईटी  गांव में...