Sunday, January 26, 2014

90वर्षीय स्वतंत्रता सेनानी ने 30 साल छोटी महिला से रचाई दूसरी शादी

दैनिक जागरण, पानीपत, 25 जनवरी 2014   से साभार
पृष्ठ संख्या 6,एक नजर

90वर्षीय स्वतंत्रता सेनानी ने 30 साल छोटी महिला से रचाई दूसरी शादी


‘‘कोझिकोडः वयोवृद्ध स्वतंत्रता सेनानी और खतरनाक कीटनाशक इंडोसल्फान के खिलाफ मुहिम चलाने वाले एएस नारायण पिल्लई (90) ने अपने से 30 साल छोटी महिला से दूसरी शादी रचाई है। उनकी पहली पत्नी की वर्ष 1986 में मौत हो गई थी। अखिल भारतीय स्वतंत्रता सेनानी संगठन की केरल इकाई के उपाध्यक्ष पिल्लई ने गुरुवार को कोझिकोड निवासी आंगनवाड़ी कर्मचारी राधा (60) से यहाँ सब-रजिस्ट्रार कार्यालय में शादी की। इस दौरान उनके कुछ करीबी लोग उपस्थित थे। पिल्लई के मुताबिक उन्होंने यह शादी वैवाहिक सुख के लिए नहीं बल्कि एक गरीब महिला को वित्तीय सुरक्षा प्रदान करने के लिए की है। पिल्लई करीब चार दशक पहले वायनाड में बस गए थे।’’
उपरोक्त समाचार छोटा होते हुए भी ध्यान खींचता है, जिसमें असामान्य उम्र पर शादी, दोनों की उम्र में असामान्य अन्तर व शादी का असामान्य उद्देश्य महत्वपूर्ण पहलू हैं। मै पिल्लई दंपत्ति को बधाई और सफल वैवाहिक जीवन के लिए शुभकामनाएँ अर्पित करता हूँ।
इस समाचार ने मुझे 14 वर्ष पीछे पहुँचा दिया, जब मैंने इसी उद्देश्य को लेकर एक आश्रमवासिनी विधवा महिला से पारिवारिक असहमति को नजरअन्दाज करते हुए अन्तर्जातीय विवाह किया था। यह अलग बात है मैं उस समय 30 वर्षीय अविवाहित युवक था। किन्तु मेरी शादी असफल हुई और प्राप्त अनुभव से महसूस हुआ कि शादी और सहायता दोनों अलग-अलग बिन्दु हैं। शादी सहायता का माध्यम नहीं हो सकती। शादी की अपनी आवश्यकताएँ, अपेक्षाएँ व अनिवार्यताएँ होतीं हैं। दोनों एक-दूसरे की शक्ति होते हैं। शादी में दोनों का समानता के स्तर पर एक-दूसरे के लिए समर्पण होता है। किसी भी प्रकार की दया शादी का आधार नहीं हो सकती। 






Saturday, January 25, 2014

गणतंत्र को शुभकामनाएँ

-ः गणतंत्र को शुभकामनाएँ:- 


भारतीय गणतंत्र को गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर उसे कर्तव्यनिष्ठ, ईमानदार व सेवाभावी नेता, लोकसेवक( जिनके हाथों फहराये जाने पर तिरंगे को गौरवानुभूति हो सके); नागरिकों के चरित्रनिर्माण में संलग्न सदाचारी, कर्तव्यनिष्ठ व आत्मसम्मानित शिक्षक; कर्तव्यनिष्ठ, राष्ट्र-भक्त व राष्ट्र के गौरव के लिए कर्मरत नागरिक मिलने की शुभकामनाएँ! 


Wednesday, January 15, 2014

प्रोपर चैनल का फण्डा-भ्रष्टाचार का झण्डा

प्रोपर चैनल का फण्डा-भ्रष्टाचार का झण्डा


भाजपा में हाल ही में शामिल नौकरशाह श्री आर.के.सिंह ने गृहमंत्री पर सनसनीखेज आरोप लगाए हैं। इसको लेकर विभिन्न टिप्पणियाँ आ रही हैं। इस पर एक प्रश्न यह उठाया जा रहा है कि श्री सिंह ने सेवा के दौरान उचित मंच पर ये मुद्दे क्यों नहीं उठाए? ऐसा पहली बार नहीं हुआ है कि किसी नौकरशाह ने सेवानिवृत्ति के बाद खुलासे किए है। ऐसा पहले भी होता रहा है और आगे भी होता रहेगा।
मेरा इस मुद्दे की सच्चाई से या इसके पक्ष/विपक्ष से कोई सरोकार नहीं है। मैं किसी राजनीतिक पार्टी से भी जुड़ा नहीं हूँ, जो किसी का समर्थन या विरोध करने का पूर्वाग्रह हो। मैं इस विषय को प्रशासन/प्रबंधन व्यवस्था के दृष्टिकोण से प्रस्तुत कर रहा हूँ। मैं इसके माध्यम से एक ऐसी व्यवस्था को उठा रहा हूँ, जो भ्रष्टाचार को संरक्षण देती है, जिसके कारण प्रशासन में भ्रष्टाचार फल-फूल रहा है। 
पद-सोपान श्रृंखला एक ऐसी ही व्यवस्था है। प्रशासन के क्षेत्र में यह एक महत्वपूर्ण व्यवस्था है और प्रत्येक कार्यालय में इसके पालन पर जोर दिया जाता है। यह प्रबंधन में भी है और प्रशासन में भी। सरकारी कार्यालयों में तो यह भ्रष्टाचारियों का कवच बन जाती है। इसके अन्तर्गत यदि किसी कर्मचारी को उच्चस्तर पर कोई विषय उठाना है तो वह ऐसा अपने निकटतम अधिकारी को छोड़कर नहीं कर सकता। कोई भी सूचना/अभ्यावेदन/ज्ञापन/शिकायत उसके निकटतम् अधिकारी (Immediate Boss) को या उसके माध्यम से ही देनी होगी। सामान्यतः यह व्यवस्था प्रबंधन को सुविधाजनक बनाती है। वैध क्रियाकलापों तक किसी भी प्रकार की समस्या भी नहीं आती, किन्तु यदि निकटतम् अधिकारी भ्रष्टाचार में या अवैध गतिविधियों में लिप्त होता है तो उसके अधीनस्थ उसकी शिकायत उसी को करने के लिए बाध्य हैं। यहीं यह व्यवस्था भ्रष्टाचार की संरक्षक बन जाती है।
किसी भी कर्मचारी के लिए अपने ही अधिकारी के कुकृत्यों के खिलाफ आवाज उठाने की हिम्मत होना ही मुश्किल होता है। उसके बाद वह उस अधिकारी के खिलाफ उच्चस्तर पर लिख नहीं सकता, क्योंकि वहाँ पद-सोपान श्रृंखला के अनुसार उचित माध्यम से शिकायत करने का फण्डा आड़ आता है। भ्रष्टाचार करने वाले अधिकारी के खिलाफ उसी अधिकारी को लिखकर देना पड़े तो बड़ी विचित्र स्थिति हो जाती है। यही व्यवस्था ईमानदार कर्मचारियों की प्रताड़ना का तथा भ्रष्टाचारी का संरक्षण करने का कारण बनती है। सर्वप्रथम तो वह अधिकारी अपने खिलाफ हुई  शिकायत को आगे जाने ही नहीं देगा। यदि उसे वह शिकायत आगे भेजनी भी पड़ी तो यहीं से वह साक्ष्यों के साथ छेड़-छाड़ व साक्षियों को प्रभावित करने की कोशश करना प्रारंभ कर देगा।
उक्त अधिकारी सबूतों के साथ छेड़-छाड़ तक ही सीमित नहीं रहेगा। वह अपने अधीनस्थ कर्मचारी को प्रताडि़त करना प्रारंभ कर देगा। उस पर झूठे आरोप लगाएगा। उसे निलम्बित या बर्खास्त भी कर सकता है। यही नहीं शिकायतकर्ता कर्मचारी को अपनी जान देकर भी ईमानदारी का मूल्य चुकाना पड़ता है। इस प्रकार उचित माध्यम(Proper Chennel) की प्रशासनिक व्ववस्था भ्रष्टाचार व अवैध गतिविधियों की संरंक्षक बन जाती है।
अतः यदि हमें देश से भ्रष्टाचार को कम करके व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त करना है तो भ्रष्टाचार व अवैध गतिविधियों से संबंधित शिकायतों हेतु उचित माध्यम के बंधन को हटा देना चाहिए। यही नहीं देश की किसी भी ऐजेन्सी को सीधे लिखने की छूट प्रदान करनी चाहिए। यही नहीं जाँच ऐजेन्सी को किसी सरकारी कर्मचारी या अधिकारी या मंत्री के खिलाफ अभियोग दायर करने से पूर्व स्वीकृति लेने की अनिवार्यता को भी समाप्त किया जाना चाहिए। कोई भी कर्मचारी या अधिकारी या मंत्री; जो अवैध गतिविधियों में लिप्त है, उसे पद-सोपान श्रृंखला का संरक्षंण क्यों मिलना चाहिए? आज आवश्यकता है कि अंग्रेजों के समय की अकुशल प्रशासनिक व्ववस्था को समाप्त कर नवीन कुशल प्रबंधन तंत्र का विकास करें, जिसमें गोपनीयता को नहीं, पारदर्शिता को प्राथमिकता प्रदान की जाय। ऐसा करके ही भ्रष्टाचार को फलने-फूलने से रोका जा सकेगा।  


Wednesday, January 1, 2014

राष्ट्रप्रेमी की ओर से नव वर्ष की सशर्त बधाई और शुभकामनाएं

राष्ट्रप्रेमी की ओर से नव वर्ष की सशर्त  बधाई और शुभकामनाएं


मित्रो एक वर्ष और बीत गया, फिर चलेगा बधाइयों का दौर 

और फिर हम सब अगले वर्ष भी किसी न किसी अपराध में सम्मिलित होकर

 या अपराध का समर्थन करके या फिर अपराध को नजर अन्दाज करके,

 हम सभी अपराधों को बढ़ावा देने और कानून और सरकार को कोसने को तैयार हो जायेंगे। 

ऐसे में किस प्रकार हमारा नव वर्ष शुभ हो सकता है?

अतः मैं आप सबको बधाई और शुभकामनाएँ तो देना चाहता हूँ 

बशर्ते हम अपने ज्ञान, भाव व कर्म को एकरूपता प्रदान कर

 सबके हित में निरन्तर कर्मरत रहने का संकल्प करें


-हम संकल्प करें-

जो सोचें, वही बोलें और वही करें

ईश्वर को मंदिर, मस्जिद, चर्च से बाहर लाकर प्रत्येक कर्म का साक्षी बनायें 

और कर्म को धर्म में परिवर्तित कर लें।

सशर्त बधाई


दो हजार तेरह का पुनः अवलोकन, चौदह की करो योजना भाई।
ज्ञान, भाव और कर्म मिले तो,   राष्ट्रप्रेमी की नव वर्ष बधाई।।

मौज-मस्ती भी तभी मिलेगी, व्यस्त रहो कुछ कर्म भी कर लो
स्वार्थ भी पूरे तब ही होंगे, सुरक्षित समाज की रचना कर लो
कानूनों से ही सुरक्षा न मिलेगी, अन्तर्मनों को शिक्षित कर लो
अधिकारों को झगड़े बहुत हो, कर्तव्यों की कुछ सुध कर लो
समानता, स्वतंत्रता और बंधुता, न्याय की भी तो करो कमाई।
ज्ञान, भाव और कर्म मिले तो,   राष्ट्रप्रेमी की नव वर्ष बधाई।।

लूटपाट, अपहरण, बलात्कार अब तजने का संकल्प करो।
दोषारोपण बहुत हो चुका, कुछ करने का संकल्प करो
मनुष्य न बन, अपराधी बनते, शिक्षालयों का संकल्प करो
अपराध मुक्त यदि समाज बनाना, सद् शिक्षा का संकल्प करो।
नकल मुक्त शिक्षालय हो तो, सदाचारी सब बनेंगे भाई। 
ज्ञान, भाव और कर्म मिले तो,   राष्ट्रप्रेमी की नव वर्ष बधाई।।

लो क सं घ र्ष !: राजीव यादव की सरकारी हत्या का प्रयास

आजादी के बाद से आज तक के इतिहास में पहली बार भोपाल कारागार से आठ कथित सिमी कार्यकर्ता कैदियों को निकाल कर दस किलोमीटर दूर ईटी  गांव में...