Thursday, June 14, 2012

खिलाडी की धमाकेदार बापसी


 सराहना और विवेचना से अधिक श्रद्धांजलि लिखने में सक्रिय फिल्म पत्रकारों ने अक्षय कुमार के करिअर का अंत कर दिया था। उनके अनुसार खिलाड़ी अक्षय कुमार की वापसी असंभव है। उनकी फिल्में लगातार पिट रही थीं। उसी दरम्यान एक-एक कर सारे लोकप्रिय स्टार की फिल्में 100 करोड़ क्लब में पहुंच रही थीं। सलमान खानआमिर खानअजय देवगन और शाहरुख खान के बाद सीधे रितिक रोशनरणबीर कपूरइमरान खान और इमरान हाशमी का जिक्र किया जाने लगा था। निरंतर असफलता के बावजूद अक्षय कुमार में कटुता नहीं आई थी। वे खिन्न जरूर रहने लगे थे। इस खिन्नता में उन्होंने अपने आलोचकों को आड़े हाथों लिया। अपनी बुरी फिल्मों की बुराई भी उन्हें पसंद नहीं आई। यह स्वाभाविक था। स्टार एक बार फिसलता है तो रुकने-थमने और फिर से उठने तक वह यों ही अपनी नाकामी पर चिल्लाता है। अक्षय कुमार अपवाद नहीं रहे।

 एक अच्छी बात रही कि फिर से शीर्ष पर आने की बेताबी में उन्होंने ऊलजलूल फिल्म नहीं कीं। वे अपनी सीमाओं और खूबियों को अच्छी तरह जानते हैं। देश का आम दर्शक उन्हें पसंद करता है। प्रशंसक और दर्शक दुखी थे कि उनके प्रिय स्टार की फिल्में क्यों नहीं चल रही हैउन्होंने इशारे में बताना शुरू कर दिया था कि वे नाखुश हैं। यही वजह है कि वे थिएटरों में नहीं जाते थे। निराशा की इस घड़ी में भी अक्षय कुमार ने अपना जोश बनाए रखा। वे लगातार फिल्में साइन करते रहे। मजेदार तथ्य है कि फ्लॉप फिल्मों की लाइन लगा देने के बाद भी उन्हें नई फिल्में मिलती रही। दर्शकों का विश्वास डगमगा गया थालेकिन फिल्म इंडस्ट्री का भरोसा बना रहा। खास कर निर्देशकों ने अक्षय कुमार का साथ दिया। साजिद खान की सभी फिल्मों के हीरो अक्षय कुमार रहे हैं। साजिद खान ने उन्हें हाउसफुल 2’ से पुन: खड़ा कर दिया। यह फिल्म सफल रही। अक्षय कुमार भी 100 करोड़ क्लब में पहुंच गए।
            
हाउसफुल 2’ की कामयाबी का श्रेय अक्षय कुमार को दूसरों के साथ शेयर करना पड़ा। ज्यादातर आलोचकों की निगाह में यह कामयाबी साजिद खान फार्मूले की कामयाबी थी। संयोग है कि उस फिल्म में अक्षय कुमार ने कोई दूसरा स्टार होता तो भी फिल्म चलती। फ्लॉप की कतार लगा चुके स्टार के बारे में ऐसी ही निगेटिव बातें होती हैं। बहरहाल, ‘राउडी राठोड़’ आई। यह फिल्म भी दर्शकों ने पसंद की। इस बार भी कुछ आलोचकों ने अक्षय कुमार को नीचा दिखाने के लिए फिल्म की कामयाबी का सेहरा प्रभु देवा के सिर बांधने की कोशिश की। उनकी वांटेड’ का उदाहरण देकर इसे दक्षिण भारतीय शैली का प्रभाव माना। निस्संदेह राउडी राठेड़’  में प्रभु देवा ने पिछली फिल्म का फार्मूला आजमाया। कामेडी और एक्शन को आम दर्शकों की समझ में आने लायक अंदाज में पेश किया। फिल्म के गाने लोकप्रिय हुए। दर्शकों ने राउडी’ मिजाज के नेकदिल हीरो को पसंद किया। गौर करें तो अक्षय कुमार ने पर्दे पर राउडी राठोड़’ के नायक को संतुलित रूप में पेश किया। इस साल की दोनों फिल्मों में अक्षय कुमार लाउडनेस से बचे हैं। प्रियदर्शन की फिल्मों में काम करते-करते उन्हें चीखने-चिल्लाने और हास्यास्पद हरकतें करने की आदत सी पड़ गई थी। दोहराव की वजह से एक ही तरह की भावमुद्रा में उन्हें देखते-देखते दर्शक भी ऊब गए थे। न किरदार नया होता था और न अक्षय कुमार को कुछ नया करने या दिखाने का मौका मिलता था।

  यों हाउसफुल 2’ और राउडी राठोड़ अक्षय कुमार के करिअर का बड़ा शिफ्ट नहीं है। उन्होंने अपने भाव और अंदाज को पुराने ढांचे में थोड़ा परिष्कृत और संयमित किया है। दोनों ही फिल्मों में उन्हें आम दर्शकों के करीब पहुंचने का मौका मिला। अब देखना है कि इस साल आ रही अन्य फिल्मों में वे इस कामयाबी को बनाए रखते हैं या फिर से डगमगाते हैं। फिलहाल इतना तो कहा ही जा सकता है कि क्या खूब लौटे हैं अक्षय कुमार। उन्होंने अपने आलोचकों की बोलती बंद कर दी है और अपने प्रशंसकों को खुश कर दिया है। जिस इंडस्ट्री में कामयाबी का सीधा रिश्ता कलेक्शन से है। वहां प्रतिभा, फिल्म और काम के स्तर पर कितना ध्यान जाता है?

(अजय ब्रह्मात्‍मज। मशहूर फिल्‍म समीक्षक। दैनिक जागरण के मुंबई ब्‍यूरो प्रमुख। सिनेमा पर कई किताबें – जैसे, ऐसे बनी लगान, समकालीन सिनेमा और सिनेमा की सोच। महेश भट्ट की किताब जागी रातों के किस्से : हिंदी फ़िल्म इंडस्ट्री पर अंतरंग टिप्पणी के संपादक। चवन्‍नी चैप नाम का ब्‍लॉग। उनसे brahmatmaj@gmail.com पर संपर्क करें।)

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