Sunday, January 8, 2012

कुछ अनकही बाते ? , व्यंग्य: मेरी धड़कनमेरी धड़कनमॉंलौट रही थी खाली घड़ा लेक...

कुछ अनकही बाते ? , व्यंग्य: मेरी धड़कनमेरी धड़कन

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लौट रही थी खाली घड़ा लेक...
: मेरी धड़कन मेरी धड़कन मॉं लौट रही थी खाली घड़ा लेकर मैं पलट रही थी भूगोल के पृष्ट... और खोज रही थी देश के मानचित्र पर नदियों का बहाव मॉं सा...

सारांश यहाँ आगे पढ़ें के आगे यहाँ

1 comment:

  1. मेरे नए पोस्ट "लेखनी को थाम सकी इसलिए लेखन ने मुझे थामा": पर आपका बेसब्री से इंतजार रहेगा । धन्यवाद। .

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आपका बहुत - बहुत शुक्रिया जो आप यहाँ आए और अपनी राय दी,हम आपसे आशा करते है की आप आगे भी अपनी राय से हमे अवगत कराते रहेंगे!!
--- संजय सेन सागर

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