Saturday, November 26, 2011

कब se

कुछ गीत है मेरे कल के...
कुछ मीत है मेरे पल के
वे खुसी रहे हरदम
मै दुआ हूँ करता रब से...
गीत मुझे आनंदित करते
मीत मेरा दुःख हारते है...
साथ साथ दोनों रहते है
मेरा कहना करते है...
उनसे मिलता हूँ
मौक़ा मिलते ही तब से...

लो क सं घ र्ष !: राजीव यादव की सरकारी हत्या का प्रयास

आजादी के बाद से आज तक के इतिहास में पहली बार भोपाल कारागार से आठ कथित सिमी कार्यकर्ता कैदियों को निकाल कर दस किलोमीटर दूर ईटी  गांव में...