Thursday, September 29, 2011

प्रेम जताने कैसे जाता..

मै प्रेम जताने कैसे जाता॥
उस प्रेम गली में कंकड़ रहते॥
हंसते थे मुझको देख वे॥
ब्यंग बाण की बानी कसते॥
वो खड़ी महल के छत पर थी॥
जब मैंने इशारा उसे किया था॥
समझ न पाए वह मुझको ॥
मै उपहार जो भेट किया था॥
मै जब राह को जाने लगता॥
हट जा कुछ यूं कहने लगते..

हम भ्रष्टाचार को ख़त्म करेगे..

हम भ्रष्टाचार को ख़त्म करेगे।
सच के दीप जला देगे॥
हम भारत का भाग्य जगा देगे॥
सच की बीज उगा देगे॥
न तो कोई गलत करेगा॥
न तो लेगा कोई घूस॥
नेता से चपरासी तक सब॥
सच की रखेगे सब मोछ॥
गली गली चौराहे पर॥
सच की नीर बहा देगे॥

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