Wednesday, September 28, 2011

पिरवर्तन और परिवर्तित होना...

जब देश में परिवर्तन की बया चलने लगे तो। विद्धावानो का कर्तव्य है की वे भी उस परिवर्तन की हवाहो का आनंद ले और उसके थपेड़ो को बर्दास्त करे। और सोचे की इस वक्त हमें क्या करना चाहिए जिससे पार्टी के लोगो का भी मनो बल न टूटे और जनता के क्रोध का भी शिकार न होना पड़े॥
जिस प्रकार से अन्ना जी ने लोकपाल आन्दोलन चला कर जनता को जागरूक कर दिया है । सरकार और सरकार के लोगो की नींद हराम हो० गयी है। ख़ास कर कांग्रेस को काफी नुकशान सहना पद सकता है। ऐसा ही कुछ आभास हो रहा है..और दूसरी पार्टी के सदस्य मौका गवाना नहीं चाहते व्यंग के तीर मौका देख कर छोड़ते रहते है। और अब यह बात भी साबित हो गयी है । जब भी चुनाव होगा उसमे कांग्रेस का काफी नुकशान हो सकता है। चिंतन और मनन करना कांग्रेस को असंभव लग रहा है। अब हम इस निष्कर्ष पर पहुचे है की। अब राहुल बाबा को अन्ना जी से साथ होना चाहिए और चुनाव में भी घोषणा करना चाहिए की इस बार हमारी के समस्त योग्य और युवा मंत्री ज्यादा होगे..और जो ईमान दार हो।, जो इमानदारी से कार्य कर सके। यही एक चारा है ।, की राहुल बाबा को अब सचेत होके पार्टी को मजबूती के साथ कड़ी करे। क्यों की राहुल बाबा को लोग प्रधान मंत्री के रूप में देखना चाहते है॥ इस परिवर्तन में राहुल बाबा को परिवर्तित हो जाना चाहिए॥ तभी कुछ कामयाबी हासिल होगी,,

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--- संजय सेन सागर

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