Friday, September 23, 2011

मेरा महबूब आया..

जब मै छुप जाती थी बागो में॥
वह आहे भरने लगता था॥
हंसी मेरी जब खुल जाती थी॥
हमें देख वह हंसता था॥
वही मेरा महबूब ..दिल्ली से बनारस आया है॥
एक बार अचानक चोट लगी॥
मै लगी तड़पने हाय हाय॥
उसने सोचा मै नाटक करती॥
कह गया मुझको बाय बाय ॥
वही मेरा मस्ताना साथी॥
सोने का हार पिन्हाया॥
दिल्ली से बनारस आया।,
फोन न आता न खाए॥
मै मजबूर कड़ी थी॥
जिस जगह पर प्यार छूता था।,
असहाय वही मै पड़ी थी॥
बही मेरा रंगीला राजा..बाहों में हाथ लगाया॥
दिल्ली से बनारस आया।
सब बंधन अब टूट गया है..सावन आने वाला है॥
एक बंधन में बांध जायेगे दोनों..फिर गाये गे गाना॥
वही मेरा सत्जन्मो का आशिक कैसा गाया तराना
दिल्ली से बनारस आया...

1 comment:

  1. वाह ...बेहतरीन प्रस्‍तुति ।

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--- संजय सेन सागर

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