Sunday, March 6, 2011

बेचारी चिड़या

चिड़िया
                 डा.सन्तोष गौड़ राष्ट्रप्रेमी
मैंने कहते सुना
बुजुर्गो को,
भारत पहले,
सोने की चिड़िया था।          
लेकिन भाई,
चिड़िया तो तब भी था,
चिड़िया अब भी है,
शिकारी !
बदल गये हैं!!
सोने को गोरे लूट ले गये,
चिड़िया पर काले गोरे टूट पड़े।
अब क्या है ?
चिड़िया का अस्थि-पंजर ,
शेष रहा,
उस पर भी ,
चिड़िया के घरेलू गीधो ने,
खींच-तान कर रखी है।
ऐसे में,
बहुराष्ट्रीय कुत्ते,
यहां आकर,
अपना,
अधिकार जमाएं,
तो उनका क्या दोष?
विवश है तो,
बेचारी चिड़िया!
बेचारी चिड़िया!!
बेचारी चिड़िया!!!

1 comment:

  1. bhaai jaan bhart pehle sone ki chidiyaa thi or agr thaa tho chidaa thaa yeh to mzaaq he maafi chaahtaa hun lekin bhtrin soch vaali rchnaa he mubark ho . akhtar khan akela kota rajsthan

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--- संजय सेन सागर

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