Thursday, February 3, 2011

भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग में एक और शहादत!

तिरुवंतपुरम भ्रष्टाचार के खिलाफ जब सार्वजनिक उपक्रम के कंपनी सेक्रटरी ने सूबे के सीएम से लेकर उच्च अधिकारियों तक पत्र लिखा और हर स्तर पर आवाज उठायी तो उसे खुदकुशी करनी पड़ी। पहली नजर में दिख रही इस खुदकुशी में अब चौकाने वाली खबर आ रही है।

खुदकुशी के बाद पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट एक नई कहानी बयां कर रही है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट पर नजर डालें तो आपको भी लगेगा कि दाल में कुछ काला तो जरूर है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के मुताबिक उनके शरीर पर आठ घाव थे। रिपोर्ट तो केवल यहीं बयां करती है कि उनकी मृत्यु कैसे हुई। लेकिन उनके शरीर पर लगे चोट कुछ पुरानी घटनाओं पर नजर डालने को मजबूर कर देतीं है।

भ्रष्टाचार के खिलाफ छेड़ी थी जंग

सासींद्रन जब एक सार्वजनिक उपक्रम मालाबार सिमेंट लि. के कंपनी सेक्रटरी थे तो कई सवाल उठाए थे।पिछले सितंबर में सूबे के मुख्यमंत्री, उद्योग मंत्री और विजिलेंस डायरेक्टर को पत्र लिखकर बताया था कि कंपनी में तेजी भ्रष्टाचार फैल रहा है। और इस पर काबू पाना मुश्किल हो रहा है। इन्होंने मैनेजिंग डायरेक्टर सेक्रेटरी पी.सूर्यनारायणन पर कंपनी की गोपनीय सूचनाओं को लीक करने का आरोप लगाया। कुछ दिनों के बाद फिर इन्होंने पत्र लिखकर आरोपों के लिए पश्चाताप किया और कुछ महीनों बाद केरला के पालक्कड़ के अपने घर में ही उन्होंने खुदकुशी की थी।

आपकी राय भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग छेड़ने वालों के साथ ऐसा क्यों होता है। आखिर कितने सोनावणे, मंजूनाथ और सत्येंद्र दुबे जैसे लोगों का साथ देने के लिए हम और आप क्यों नहीं हाथ बढ़ाते हैं। उनकी शहादत हमारे लिए केवल अफसोस क्यों बन जाती है। इसे मुकाम तक पहुंचाने के लिए हम क्यों नहीं हाथ बढ़ाते हैं अपनी राय दुनियाभर के पाठकों के साथ शेयर कीजिए।

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--- संजय सेन सागर

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