Saturday, January 22, 2011

jeevan karm

हर  सुबह नई आशा  के साथ जागो;
 दिल में विश्वास रखो ऊपर वाले के प्रति;
गिरो अगर तो गिरकर संभालो खुद को;
जिन्दगी में जीत फिर तुम्हारी होगी!
ये मत सोचो क्या खो दिया;
रखो आशा कुछ पाने की;
मत रो अपनी विफलता पर ;
लिखो नयी इबारत कामयाबी की!
संघर्षो की राह पर चलकर  ;
मंजिल पालो सपनो की;
गम की गर्मी में तपकर ही
मिलेंगी सांसे राहत की!
जीवन कर्म का स्थल है;
आराम  यहाँ  कहाँ  करना  है;
निज  प्रयास
की क्यारी  को खुशियों  के फूलो 
 से  भरना  है !

3 comments:

  1. बहुत सुन्दर आशा जगती कविता.बधाई..

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  3. बहुत सुन्दर विचार !

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आपका बहुत - बहुत शुक्रिया जो आप यहाँ आए और अपनी राय दी,हम आपसे आशा करते है की आप आगे भी अपनी राय से हमे अवगत कराते रहेंगे!!
--- संजय सेन सागर

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