Saturday, January 22, 2011

प्यारा सा संवाद



हर दम तो साथ - साथ रहता है !
जेसे हमसे  ही वो कुच्छ कहता है !
माँ भी तो हर दम जान जाती है !
इशारों - इशारों मै सब कुछ  बताती है !



जब वो थोडा और बड़ा होता है !
घुटनों के बल इधर - उधर डोलता है !
माँ का दम ही निकल जाता है ,
जब वो थोडा सा भी रोता है !






जब वो स्कूल को निकलता है !
माँ के पल्लू  से हरदम लिपटता है !
लगता है जेसे माँ से बिछड़ने का ........
हरदम उसे खोफ सा ही रहता है !





जब जवानी मै पांव वो रखता है !
यारों दोस्तों से जब वो मिलता है !
तब माँ के उस एहसास को............... 
थोडा - थोडा सा अब वो खोने  लगता है !





अब माँ का आशीर्वाद फिर वो पाता है !
घर मै प्यारी दुल्हन ले के आता है !
उसके साथ रंग - बिरंगे सपने देख कर 
फिर वो एक नया संसार बसाता  है !

5 comments:

  1. bahut sundar sachitra kavita.kali ke phool banne ko bahut hi khoob soorati se varnan kiya hai aapne badhai....

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  2. यथार्थमय सुन्दर पोस्ट
    कविता के साथ चित्र भी बहुत सुन्दर लगाया है.

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  3. शालिनी जी व् संजय जी का बहुत - बहुत शुक्रिया !

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  4. लाजवाब पोस्ट, पढकर अच्छा लगा।
    धन्यवाद।

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आपका बहुत - बहुत शुक्रिया जो आप यहाँ आए और अपनी राय दी,हम आपसे आशा करते है की आप आगे भी अपनी राय से हमे अवगत कराते रहेंगे!!
--- संजय सेन सागर

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