Tuesday, January 25, 2011

डा श्याम गुप्त का गीत ......ए मेरे मन ....

ऐ मेरे मन ...ऐ मेरे में..ऐ मेरे में ..


आज तू है उदास क्यों इतना ,
कैसी चिंता ने तुझको घेरा है |
किन ख्यालों में आज डूबा हुआ,
कौन से गम ने डाला डेरा है ||.....ऐ मेरे मन ...


हमने देखे जो सपने तू उन्हें याद न कर,
टूटे सपनों की किसी से तू फ़रियाद न कर |
तेर सपने थे कि सुन्दर ज़हां बसायेंगे,
देश संस्कृति को नए ढंग से सजायेंगे |.....ऐ मेरे मन ....


मिट गए देश की खातिर जो लिए सिर  पै कफ़न,
मिट गए चाह लिए एसा व स्वाधीन वतन |
मिट गए आस लिए देश बनेगा ये चमन |
लुट गए देश पै ,बन जाए यही राहे- अमन ||.......ऐ मेरे मन ....


बात अब देश संस्कृति की न करता कोई,
उन शहीदों की भी राहों पै न चलता कोई |
याद में वीरों की अब कौन लगाए मेले ,
बीर रस के भी नहीं गीतों को सुनता कोई ||......ऐ मेरे मन ....


श्याम, चलिए जहां गम के न हों मेले कोई,
हम अकेले हों न हों सारे झमेले कोई |
याद में वीरों की पथ-दीप जलाए जाएँ,
उन की रहां को भी पुष्पों से सजाये कोई ||


ऐ मेरे मन ....ऐ मेरे मन .... ऐ मेरे मन .....||

6 comments:

  1. वाह श्याम सुन्दर जी
    बहुत सुन्दर गीत, मन प्रसन्न हो गया
    बहुत बहुत शुभकामना

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  2. बहुत सुन्दर गीत्……………गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनायें।

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  3. धन्यवाद दीप व वन्दना जी..
    गीत भला क्या होते हैं
    बस एक कहानी है।
    मन के सुख दुख अनुबन्धों की
    व्यथा सुहानी है.....

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  4. धन्यवाद दीप व बन्दना जी....

    गीत भला क्या होते हैं
    बस एक कहानी है।
    मन के सुख दुख अनुवन्धों की
    व्यथा सुहानी है

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  5. श्याम, चलिए जहां गम के न हों मेले कोई,
    हम अकेले हों न हों सारे झमेले कोई |
    याद में वीरों की पथ-दीप जलाए जाएँ,
    उन की रहां को भी पुष्पों से सजाये कोई ||
    सारा ही गीत बहुत खुबसूरत !
    सुन्दर रचना !

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  6. धन्यवाद मीनाक्षी जी---पथ-दीप जलाये चलिये

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आपका बहुत - बहुत शुक्रिया जो आप यहाँ आए और अपनी राय दी,हम आपसे आशा करते है की आप आगे भी अपनी राय से हमे अवगत कराते रहेंगे!!
--- संजय सेन सागर

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