Tuesday, January 11, 2011

धर्म



क्या होता है धरम ?  किसका नाम है धर्म  ?
मार - धाड़ , छीन - झपट नहीं - नहीं धर्म ये तो नहीं !
अगर हम सच मै जानना चाहतें हैं ,  कि धर्म  क्या है ?
तो हमे मंदिर, मस्जिद और गुरुद्वारों मै जाकर देखना होगा !
उस वक़्त लोगों के अन्दर का जूनून ...मदमस्त गूंजती आवाजें !
उस वक़्त कुच्छ भी कर डालने का ज़ज्बा ..........................
हमारे तनबदन को झुमने पर मजबूर कर डालता है !
उस वक़्त हमारी भावना इतनी सच्ची  होती है ..............
कि हम कुच्छ भी कर गुजरने को तैयार  हो जाते हैं !
काश वो ज़ज्बा ....................हर वक़्त हमारे अन्दर रहे
वही एहसास तो धर्म  है जो हमें  ...............................
कुच्छ कर गुजरने को कहता है !
जिसमें  प्यार , शांति , मोहब्बत ,समर्पण .........
जेसे भाव जगतें हैं जो हमे ........बेसाहारा और दिन - दुखियों  
कि सेवा करने को प्रेरित करते हैं !
यही तो है वो प्यारा सा धर्म  .........................................
जिसको न समझ पाने कि वजह से................... 
हम उसकी तलाश ता उम्र जारी रखतें हैं !
अगर वो एहसास हर समय बना रहे तो ............
हमे धर्म  कि परिभाषा जानने कि जरूरत ही न पड़े !
   

2 comments:

  1. bahut achchhi bhavna se saji kavita.vastav me aaj dharm ko jis roop me liya ja raha hai vahi sab vivadon ki jad hai jabki dharm to ek rasta hai apne ishwar ko pane ka,apni zindigi chain se guzarne ka.aap ke bhav me ek achchhe insan ki jhalak dikhati kavita...

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आपका बहुत - बहुत शुक्रिया जो आप यहाँ आए और अपनी राय दी,हम आपसे आशा करते है की आप आगे भी अपनी राय से हमे अवगत कराते रहेंगे!!
--- संजय सेन सागर

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