Sunday, January 23, 2011

गरीब देश या सोने की चिड़िया

गणतंत्र दिवस के मोके पर सोचा कुछ  एसा लिखूं की कुछ  पल के लिए ही पर कुछ  देश के लिए अच्छा करने का एहसास सा तो आये ! हो सकता है  हमारा ये प्रयास सफल होने की दिशा मै ही बढ जाये ! ये हमारे देश के लिए सच मै विचारणीय विषय है की जिस देश को लोग सोने की चिड़िया कह कर पुकारते थे उस देश मै कुछ लोग  इतने  गरीब भी है की उनके पास दो वक़्त की रोटी जुटा पाना भी बहुत मुश्किल हो जाता है ! एसा नहीं की बीते दशक मै हमारे देश ने कई ऊँचाइयों को न  छुआ हो पर अगर देश एक तरफ बहुत आगे पहुँच गया है  तो उनमे से कुछ एसे लोग भी हैं जिन्हें गरीबी की मार काफी हद तक झेलनी पड़ी है ! क्या हमारा देश सच मै गरीब देश है ? मेरे ख्याल से नहीं ................क्युकी कुछ आंकड़े तो ये कहने से इंकार करते हैं की भारतीय लोग गरीब हैं ...........?  पर भारत वास्तव मै गरीब देश है ये भूख से बिलखते बच्चे और गर्भावस्था के दोरान दम तोडती माँ के खुलासे बयाँ करते हैं ! और दूसरी तरफ इसी बात को सिरे से नकार देते हैं उन कला धन जमाखोर जो खाते और कमाते तो भारत मै हैं पर अपनी जमा पूंजी विदेशो के बैंकों मै जमा करवा देते हैं और अपनी जनता जिनसे की उन्होंने ये सब धन कमाया उसे ही रोता बिलखता छोड़ देते हैं ! अब देखो न विदेशों मै 280 करोड़ रूपये............ सिर्फ भारतीयों के मोजुद हैं इनकी संख्या ज्यादा भी हो सकती है ! विदेशी बेंको की जानकारी के अनुसार 5 साल के दोरान भारतीय नेताओं , I. A. S अफसर , I . P. S अधिकारियों , कलाकारों और खेल जगत से जुड़े लोगों के 325 बिलियन रूपये विदेशी बेंकों मै जमा हैं ! काला  धन बनाने मै भारत सबसे आगे है ! वहां देश का 1456 अरब डालर पैसा जमा है ! पांच एसे देश जो भ्रष्टाचार मै सबसे उपर हैं !
                भारत ...............$ 1456 बिलियन ( 1947 से )
              रूस ...................$ 470 बिलियन
              यु के .................$ 390 बिलियन
             युकेरियन .............$ 100 बिलियन
              चीन  ...................$ 96 बिलियन
                                                              अब ये सब खुलासे तो यही बयाँ करते हैं की हमारे अपने देश का इतना पैसा केसे बाहर के देशों  मै  इस्तेमाल हो रहा है  और हमारी जनता कुछ  भी   कर पाने मै असमर्थ है !  विदेशी बैंक उन सभी लोगों के  नाम बताने को तैयार है जिनके वहां पर खाते हैं पर उनका कहना है की अगर भारतीय सरकार उनसे इस बात का खुलासा मांगेगी तभी वो इन सब बातों को बताएगी अन्यथा नहीं पर न जाने क्यु हमारी सरकार इस बात मै इतनी ढिलाई बरत रही है जबकि ये सब हमारे देश के हित की ही बात है ! अगर इनमे नेताओं का भी नाम आता है तो भी देश के हित को ध्यान मै रख कर इसमें कारवाही होनी ही चाहिए ! अब हमारे देश के कुछ  एसे व्यापारी लोग भी हैं जो 1. 5 ट्रिलियन डॉलर काला  धन कमाते हैं जबकि हमारे देश मै 3000 से 4000  बच्चे एसे हैं जो अच्छे पोषण न मिलने की वजह से रोज़ जान गवां बैठते हैं और हर रोज़ 1000 माएं गर्भावस्था के दोरान जान दे देती हैं ! भारत मै ही 70 % लोग खून की कमी से ग्रसित हैं ! इससे साफ़  जाहिर है की अगर भ्रष्टाचार इसी तेज़ी से बढता रहा तो आने वाले 50 दशकों मै कहीं भारतीयों  का वजूद............. ही न खत्म   हो  जाये ! एक तरफ देश की एसी हालत हो रही और दूसरी तरफ काला धन कमाने वालों का ये हाल है की जेसे पैसा जोड़ - जोड़ कर सीने मै पदक लगाने की तैयारी मै लगे हों ! काला धन संचय अगर अपने देश मै ही रहता तो इन पैसों से हमारे देश की काया  ही बदल जाती जेसे ......जिन पैसों का 30 सालों से सिर्फ टेक्स न देने की वजह से छुपा कर रखा हुआ है वही हमारी देश की प्रगति मै चार चाँद लगा देती और हमारा  देश खुशहाल देश कहलाने लगता जेसे .....................

1 ...........वही काला धन 60 करोड़ लोगों को नोकरी लगवा सकता है !
2.............हर गाँव और शहर मै सुन्दर सड़कें बनवा सकता है !
3.............हर गाँव मैं  बिजली की सुविधा जुटा कर उन्हें रोशन कर सकता है !
4............सभी बुजुर्गों को 2000 रूपये तक दे कर उनकी जीवन शैली सुचारू रूप से चला सकता है !
                                                                 अब इतना पैसा होने पर भी हमारे देश को अगर किसी और का मुंह  ताकना पड़े तो ये हमारे लिए कितने शर्म की बात है ! अगर ये सारा पैसा यहाँ हो तो हमे किसी भी बैंक से लोन लेने की जरूरत ही न पड़े अब इसे अंदाज़ा लगता है की इन लोगों ने हमारा कितना पैसा रोक कर रखा हुआ है ! हमारा और आपका तो ये छोटा सा प्रयास  भर ही है की काश कुछ एसा हो जाये की सरकार तक हमारी ये बात पहुँच जाये और वो इन सब के खिलाफ कार्यवाही  करने की मंजूरी दे दे और हमारे देश का पैसा वापस हमारे देश मै आ जाये और सबको एक खुशहाल जीवन जीने का हक मिल जाये और हमारी ये मुहीम सफल हो जाये !
                         
काश इस दर्द को .............
                      कोई तो समझ पाता !
                         गरीब माँ के आंसुओं को
                    कोई तो जान जाता !
                          किस तरह भूखे बच्चों को .....
                    वो सुलाती होगी !
                          हर पल रो रो के
                   पल्लू से मुंह  छुपाती होगी !
                          एसा नहीं की पेसे वालों के  ...........
                   सीने मै कोई दिल नहीं !
                          लगता है इन सबको देखने का
                   उनके पास वक़्त  नहीं !
                          पर इस एहसास को उनमें ..............
                   हमें ही जगाना होगा !
                           उनको आवाज़ देके.............
                    हमें  ही बुलाना होगा !
                            क्युकी ये तो हम सब की
                   सांझी ही  लड़ाई है !
                             क्युकी वो मासूम लोग
                   हमारे ही तो भाई हैं  !
                              चलो फिर आज से ही
                    ये प्रण हम लेते हैं !
                                इन सबके विरुद्ध ................
                    जंग का एलान करते हैं !
                                 बेड़ियों मै जकड़ी इन ............
                    मोका परिस्तियों से
                               अपने देश को स्वतंत्र करते हैं !
                     आज़ादी की इस मशाल को
                             एक बार फिर से ज्वलंत करते हैं  !
                     

1 comment:

  1. भ्रष्टाचार के दलदल में जड़ तक धंस चुका है भारत।षिक्षा,राजनीति,खेल,मीडिया,उधोग सभी भ्रष्टाचार की गिरफत में है ।भ्रष्टाचार की दहषत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सुप्रीम कोर्ट को भी यह कहना पडा की भ्रष्टाचार को भी संविधान का एंक हिस्सा बना लेना चाहिए । सच भ्रष्टाचार एक ऐसी जहरीली हवा की तरह फैल रहा है,जिसमें आम आदमी का सांस लेना मुष्किल है। भ्रष्टाचार को अभी एक तरह से मिटा पाना तो आसान नही होगा लेकिन हम तीव्र गति को कम जरूर कर सकते है । आज हमें जरूरत है की हम भ्रष्टाचार और आम आदमी के मध्य के रिष्तो पर रोषनी डा़ली जाए ताकि आम आदमी को भ्रष्टाचार के बुरे प्रभावों के प्रति जागरूक किया जा सके,इस तरह के आयोजनो के माध्यमों से हमें भ्रष्टाचार के दारा आम आदमी को पहुंची क्षति पर चिंतन,या यूॅ कहें तो मंथन करने की आवष्यकता है।
    भ्रष्टाचार को मिटाने लिए जरुरी है कड़े कानून बनाए जाएँ,और प्रशासन अपने अधिकारियों और पदाधिकारियों पर नजर रखें,लेकिन कुल मिलाकर पूरी नियति बदलने से जरूरी है नियत बदलना आज चपरासी तक सोचता है की कुछ थोडा बहुत ऊपरी मिल जाए.हम अपनी नियत ठीक कर लें तो किसी नियमों को कड़े करने की जरूरत नहीं है,भ्रष्टाचार मुक्त समाज के निर्माण के लिए हमें जरूरत है कि उसमें रहने बाले आम आदमी ,विषेष जन एवं जनप्रतिनिधियों के मन मस्तिष्क में भ्रष्टाचार की एक भयानक तस्वीर को उभारा जाएॅ और यह तभी संभव है जब आम आदमी को चिंतन और मंथन के माध्यम के जागरूक किया जा सके ।

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आपका बहुत - बहुत शुक्रिया जो आप यहाँ आए और अपनी राय दी,हम आपसे आशा करते है की आप आगे भी अपनी राय से हमे अवगत कराते रहेंगे!!
--- संजय सेन सागर

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