Wednesday, December 1, 2010

hidustan ka dard

बंटवारा बहुत बुरा होता है और ये वही जानते हैं जिन्होंने इसे झेला हो .एक घर का बंटवारा आदमी नहीं झेल पता फिर देश का बंटवारा झेलना तो सहनशक्ति के बाहर की बात है.हिंदुस्तान और पाकिस्तान दोनों एक ही मिटटी की उपज हैं और ऐसे में जब इनके आपसी मसले सुलझाने के लिए बाहरी मदद ली जाती है तो दोनों तरफ की जनता रो पड़ती है साथ ही जब भाई भाई का दुश्मन होकर खून खराबे पर उतर आता है तो जनता खून के आंसू बहाती है  .भारत ने हमेशा पाकिस्तान के साथ नरमी का बर्ताव किया है .युद्ध के जवाब में युद्ध किये हैं कभी खुद कोई युद्ध नहीं किया और आज भी भारत इसी नीति पर कायम है ऐसे में पाकिस्तान को भी आपसी मसले निबटाने के लिए खून खराबे की नीति को छोड़ कर आपसी सामंजस्य की नीति को अपनाना चाहिए.
सभी कहते हैं कि इस दुनिया में सब अकेले आयें हैं अकेले ही चले जायेंगे .ना कोई कुछ लेकर आया है ना कोई कुछ लेकर जायगा फिर दोनों देशों के राजनेता इन उक्तियों पर विश्वास क्यों नहीं करते .आखिर जब सब यहीं रह जाना है तो फिर किसी जगह के लिए लड़ने का क्या मतलब है.जो जगह जहाँ से जुडी है उसे वहीँ जुडी रहने दें और शांतिपूर्वक विकास के पथ पर अग्रसर हों .
भारत ने आज तक शांति पथ का अनुसरण करते हुए बहुत दर्द झेला है और तब भी भारत की यही कोशिश है कि आपसी मसले शांति वार्ता से निबट जाये किन्तु दर्द तो यही है कि ये बात भारत अर्थात  हिंदुस्तान के भाई की समझ में नहीं आती एक शायर  इसी दर्द को बयां करते हुए कहते हैं--
"ये हमारे ज़र्फ़ कि बात है कि हर सितम को भुला दिया,
रहे हम तो खाक नशीं मगर तुम्हे आसमा बना दिया,
मैने कहा था बागवान मुझे रोशनी की तलाश है,
लेकिन उसने जवाब में मेरा ही आशियाँ जला दिया.

3 comments:

  1. क्या करेगा प्यार वो ईमान को ,
    क्या करेगा प्यार वो भगवान को !
    जन्म लेकर गोद मै इन्सान की ,
    कर न पाया प्यार जो इन्सान को !

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  2. bahut hi khubsurat baat kahi aapne dost .

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आपका बहुत - बहुत शुक्रिया जो आप यहाँ आए और अपनी राय दी,हम आपसे आशा करते है की आप आगे भी अपनी राय से हमे अवगत कराते रहेंगे!!
--- संजय सेन सागर

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