Sunday, December 26, 2010

राजस्थान में आम आदमी के अधिकार सुरक्षित नहीं , कानून नाम की चीज़ नहीं हे यहाँ

दोस्तों यह मेरा राजस्थान हे यहाँ जब भाजपा सरकार थी और गुर्जरों ने आन्दोलन कर जनता की सुख शांति तहस नहस की थी तब मेने और मेरे जेसे ना जाने कितने कोंग्रेसियों ने भाजपा सरकार को निकम्मी नाकारा कहते हुए विधि विधान के प्रावधान के तहत सरकार को बर्खास्त करने की मांग तक कर डाली थी , में कोंग्रेसी था मेने भाजपा को हराने और कोंग्रेस को सत्ता में लाने का प्रयास किया और में ,मेरे साथी इस मामले में सफल भी हुए लेकिन आज करीब एक सप्ताह से राजस्थान में कहीं कानून नाम की चीज़ नहीं हें य्हना जंगल कानून लागू हे और जिसकी लाठी उसी की भेंस की तर्ज़ पर गुर्जर भाइयों ने उत्पात मचाया हे कानून तोडा हे और सरकार हे के हथाजोड़ी में लगी हे , यकीन मानिए रेलवे स्टेशन पर बस स्टेंड पर घर और दफ्तरों में आम आदमी के चेहरे पर यह खोफ देख कर मेरे अंदर का कोंग्रेसी मर गया और अब मेरे में एक आम इंसान आम हिन्दुस्तानी जाग गया हे ।
मेरे अंदर जब आम हिन्दुस्तानी जागा हे तो मेने पाया हे के राजस्थान में पहले भी गुर्जर भाइयों ने विधि विरुद्ध जमाव कर राजस्थान में कानून व्यवस्था ठप्प की थी और फिर इसी राजस्थान में कोंग्रेस सरकार की लापरवाही के चलते गुर्जरे भाई धीरे धीरे रेलवे ट्रेक हाइवे पर जमा हुए इनकी रसद , इनका खाना पीना सब इन लोगों ने अख्ट्टा किया और सभी कायदे कानून ताक में रख कर राजस्थान का सम्पर्क देश भर से कट दिया सरकार हे के करोड़ों रूपये प्रतिदिन का नुकसान उठा रही हे और इन लोगों को जो कानून तोड़ने के आदतन अपराधी हे हवा दे रही हे भगवान की तरह इनकी आरती कर रही हे आम जनता का इस माहोल में साँस लेना मुश्किल हे उसका सुख चेन आज़ादी छीन गयी हे जीना दुश्वार हो गया हे और जिस सरकार ने राजस्थान में अमन चेन कानून व्यवस्था बनाये रखने की शपथ ली थी आज उसी सरकार में खुलेआम कानून से गुर्जरों द्वारा बारी बारी से सामूहिक बलात्कार किया जा रहा हे । देश के सुप्रीम कोर्ट ने बंद , जाम और ऐसे कानूनी अवहेलना के मामलों में सरकार को सख्ती से निपटने के निर्देश दिए हें देश में हजारों कानून ऐसी व्यवस्था से निपटने के बनाये गये हें जो लोग दूसरों की सुख शांति भंग करते हें उन्हें गिरफ्तार करने और उत्पात मचाने पर लाठी से खदेड़ने और अधिक जानलेवा उत्पात मचाने पर गोली तक मारने का कानून हे शुप्रिम कोर्ट ने तो हल ही में गुर्जरों के आन्दोलन के बाद उपजी स्थति के मामले में यहाँ तक कह दिया था के देश में कानून हे ऐसा आम जनता को लगना चाहिए और देश का प्रत्येक नागरिक अपने संवेधानिक अधिकारों को प्राप्त कर रहा हे सुरक्षित और आज़ाद हे यह सुनिश्चित करना सरकार का काम हे और जो सरकार ऐसा नहीं कर सके उस सरकार को संवेधानिक प्रावधानों के तहत बर्खास्त कर देना चाहिए लेकिन सरकार हे के वेंटिलेटर पर आम आदमी को चला रही हे । देश में संविधान के अनुच्छेद ३५४ से ३५८ में ऐसी स्थिति में जब किसी भी राज्य में कानून व्यवस्था छिन भिन्न हो जाए आम जनता के संवेधानिक अधिकार सुरक्षित नहीं रहे और सीधा कुछ गुंडों का गुंडा राज कायम हो जाये और सरकार उनसे निपटने की जगह उन्हें आश्रय देकर जनता के लिए और बड़ी परेशानी पैदा करे ऐसे में सरकार को भंग कर राष्ट्रपति शासन लगा देना चाहिए आज पूरा देश पुरे देश का पक्ष विपक्ष और राष्ट्रपति , राज्यपाल जी मिडिया वाले सब राजस्थान की इस जनता की सुख शांति के साथ सामूहिक बलात्कार को रोज़ देख रहे हें और राजस्थान सरकार की जी हुजूरी ने तो सरकार की कानून व्यवस्था को तार तार कर दिया हे ऐसे में बस अब आप बताओ शासन अगर आपके पास हो तो हमारे राजस्थान की भोली भली जनता की इन हालातों में सरकार की नाकामी और कुछ लोगों के कानूनी बलात्कार से हमें केसे मुक्ति दिलवाई जा सकेगी । अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

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