Saturday, December 11, 2010

मै ऊब चुका हूँ...

धुल भरी आंधी आयी है॥
कुछ दिन के लिए मै सो गया हूँ॥
टूट पड़े गम बदली॥
सादे कपडे में भीग चुका हूँ॥
अच्छे दिन फिर आ जायेगे॥
मै भी लिखूगा हर पल को॥
लेकिन आया जो पल है ये॥
इस पल से मै ऊब चुका हूँ...

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--- संजय सेन सागर

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