Thursday, December 9, 2010

पुरस्कार


कोई पुरस्कृत क्यु होता है ?
कोई जिंदगी भर बिना इनाम के ही ....
इनाम वाला भी  हो जाता है
और कुच्छ लोग लगातार .........
नाम - इनाम बटोरते ही रहते हैं
तो कुच्छ नाम येसे  भी हैं ,
जो इनाम की शक्ल  ही बदल देते हैं
वे लेते हैं......... तो खबर बनती है
ठुकराते हैं...... तो भी खबर बनती है
क्युकी जो धूर्त होते हैं ...
वो ........बहुत मीठे होते हैं
और मीठे फलो मै कीड़े भी
जल्दी होते हैं ...............
तो बस उनकी मुस्कराहट को
तय करने दो .......?.
की उनकी मुस्कान कितनी निर्दोष है
और फिर वो  मिले तो जानो .....
 की उनकी आँखों मै कितनी चमक है ?
आखिर मै बस..... मिट्ठा न मिले तो..........
नमकीन से काम चलेगा क्या ?
आजकल तो जेबकतरों और
उठाई -गीरों को भी इनाम
दे दिए जाते हैं ...............
तो अब हम केसे तय करे की ...........
पुरस्कार केसे दिए जाते हैं ?       

4 comments:

  1. बेहतरीन... बहुत खूब!

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  2. मैं क्या बोलूँ अब....अपने निःशब्द कर दिया है..... बहुत ही सुंदर कविता.

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  3. सही कह रहे हैं।

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  4. आप सभी का बहुत बहुत शुक्रिया दोस्तों आप जिस तरह से हमारे साथ हैं हम आपके इस साथ को हमेशा बनाये रखने की कोशिश करेंगे !

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आपका बहुत - बहुत शुक्रिया जो आप यहाँ आए और अपनी राय दी,हम आपसे आशा करते है की आप आगे भी अपनी राय से हमे अवगत कराते रहेंगे!!
--- संजय सेन सागर

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