Friday, December 10, 2010

देस्श में भ्रस्ताचार ही भ्रष्टाचार

विश्व भ्रस्टाचार दिवस पर भी भ्रष्टाचार ही भ्रस्टाचार

दोस्तों विश्व भ्रस्टाचार दिवस के उपलक्ष में आप सबको बधाई , भ्रस्टाचार मामले में हमारा देश ७५ प्रतिशत त्रस्त हे और यहाँ का करीब २० लाख करोड़ रुपया विदेशों में जमा हे जो अब बढ़ कर २५ लाख करोड़ रूपये हो गयी हे , दोस्तों कम से कम हमारा देश भ्रस्टाचार मामले में तो तरक्की कर ही रहा हे और तरक्की भी कितनी के इस देश में भ्रस्ताचार की जांच करने वाली केन्द्रीय सतर्कता समिति के आयुक्त थोमस खुद भ्रष्टाचार मामले में उलझे हुए हें उलझे भी ऐसे के प्राथमिक आधार पर थोमस को प्रथम द्रष्टया दोषी मानकर सुप्रीम कोर्ट ने दोषी मान लिया हे लेकिन जनाब को शर्म ही नहीं हे और वोह पद से इस्तीफा देना नहीं चाहते हें ।
देश का २५ लाख करोड़ रूपये जो बाहर भेजा गया हे मेने मेरे साथ बेठे कुछ पढ़े लिखे लोगों से लिख कर बताने को कहा कई लोग पोस्ट ग्रेजुएट थे लेकिन इस रकम को कोई लिख नहीं सका अब दोस्तों देश के नोजवान जिस राशी को लिख भी नहीं पा रहे हें इससे भी कई अधिक राशि आज विदेश में हे जो हमारा हक हे । हमारे देश में आज भ्रस्ताचार शिष्टाचार बन गया हे और भ्रस्ताचार रोकने के लियें जितने भी कानून बने हें वोह ढीले हें क्योंकि इन कानूनों को भर्स्ट लोगों ने ही तय्यार किया हे आज देश में भ्रस्ताचार को रोकने का कानून जो कुल दो प्रष्ट का हे अपने आप में मजाक हे करोड़ों की रिश्वत लेते पकड़ो और मामला थाने और जमानत का हे विचारण जज स्तर के अधिकारी करेंगे । इस तरह से भ्रस्ताचार निरोधक दिवस पर देश का ही भ्रस्टाचार छाया रहा हे देश में घर से लेकर दफ्तर और दफ्तर से लेकर बाहर तक भ्रस्ताचार हे इस मामले में ७५ फीसदी लोग प्रभावित हें ईमानदार वही हे जिनको मोका नहीं मिला हे देश में लोकायुक्त कानून हे लेकिन निष्प्रभावी हे केन्द्रीय सतर्कता आयुक्त पद पर केसे लोग बैठते हें आज जग ज़ाहिर हे भ्रस्ताचार निरोधक विभागों में जो अप्रभावी नाकाबिल अधिकारी होते हें उन्हें सजा के बटर भेजा जाता हे न्यायालयों में सरकारी वकील ढंग से पेरवी नहीं करते यहाँ तक के बार बार मांग उठने पर भी देश में भ्रस्ताचार नियन्त्रण के लियें कानून में कोई नया संशोधन नहीं किया गया हे ना ही नया कानून प्रभाव में लाया गया हे जबकि देश में भ्रस्ताचार मामले में फंसी की सजा की मांग उठती रही हे लेकिन नेता हो छे अफसर शाही हो इस मामले में कोई बहस करने को तय्यार नहीं हे संसद में कोई कानून बनाने को तयार नहीं हे और अख़बार विज्ञापनों के बोझ ते इतने दबे हें के वोह तो इन खबरों को छापना ही नहीं चाहते जबकि इलेक्ट्रोनिक मीडिया की खबरें तो स्पेक्ट्रम घोटाले में चोंका देने वाली हे ऐसे में छोटा मुंह बढ़ी बात तो हे लेकिन बिलकुल सच हे के बस अब दश के भ्रस्ताचार के खिलाफ अलख जगाने का सारा भार ब्लोगर साथियों पर ही आन पढ़ा हे तो जनाब मेरे ब्लोगर भाइयों जुट जाओ और अगले साल ९ दिसम्बर अंतर्राष्ट्रीय भ्रस्ताचार दिवस के दिन अधिकतम भ्रष्ट भेदिये देश की जेलों में हो और सरकार कोई कठोर और प्रभावी कानून बना कर भर्स्ट लोगों को सजा देने का प्रावधान बनाए । अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

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