Saturday, December 4, 2010

पंचम...

पंचम यानी राहुल देव वर्मन ने सत्तर के दशक में भारतीय फिल्म संगीत को एक नया आयाम दिया .इस दौर में गानों में और अधिक ताजगी आ गयी .प्रयोगधर्मी पंचम को मेहमूद ने अपनी पहली फिल्म ‘छोटे नवाब’ में अवसर दिया और पहले गीत ‘घर आजा घिर आए बदरा’ के लिए लता से प्रार्थना की.
अपनी प्रयोगधर्मिता के कारण ही पंचम को टेक्नोलॉजी के प्रति गहरा लगाव था। पंचम ने सचिन देव बर्मन के सहायक के रूप में काम किया और उनकी फिल्मों में कुछ रचनाएं भी की थीं, मसलन, फिल्म ‘प्यासा’ की ‘सिर जो तेरा चकराए या दिल डूबा जाए’ और ‘आराधना’ का ‘रूप तेरा मस्ताना’ इत्यादि.
उन्हें पार्श्व संगीत के लिए प्रयोग करना पसंद था, जैसे खाली बोतल में फूंक मारने की ध्वनि ‘शोले’ में इस्तेमाल की है, तो रात भर जागकर बरसते पानी की ध्वनि को रिकॉर्ड किया है.

3 comments:

  1. अच्छी जानकारी देने के लिए, धन्यवाद

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  2. आर.डी.बर्मन साहब के संगीत पर उत्तम एवं संक्षिप्त पोस्ट पढ़ने को मिली.

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  3. अच्छी जानकारी के लिए शुक्रिया दोस्त !

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आपका बहुत - बहुत शुक्रिया जो आप यहाँ आए और अपनी राय दी,हम आपसे आशा करते है की आप आगे भी अपनी राय से हमे अवगत कराते रहेंगे!!
--- संजय सेन सागर

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