Wednesday, November 17, 2010

जिंदगी जीना भी एक कला


इक दिन जिंदगी से................ मैने
शिकायत जो ये की ........
तो उसने भी हंसके हमसे ये कह दिया ?

कोंन कहता है जिंदगी हंसी नहीं होती
एक बार आजमा के तो देखो तुम
हो न जाये हमसे मोहबत  तो कहना
एक बार हमारी गली आके तो देखो तुम
लोग कहते हैं मोहबत बेवफा होती
शायद उनमे भी कोई कमी होती होगी
जरा इजहारे वफ़ा का अंदाज़ तो सीखो
इकरारे वफ़ा चल के न आये तो हमसे कहना तुम
हाँ ........... वो हर पल इम्तहान लेती है
उसका बस जवाब बन जाओ तुम
अपने को उसकी आदत जो बना दोगे
जिंदगी हंसी न बन जाये तो मुझसे कहना तुम
उससे ......गरचे फिर दूर भी तुम जाओगे
उसे [ जिंदगी ] तुम अपने  उतने ही करीब पाओगे
जिंदगी के जीने का तो इतना सा फसना है
फिर इससे दूर कहाँ तक जाओगे तुम ?

2 comments:

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--- संजय सेन सागर

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