Thursday, November 11, 2010

नारी जीवन की एक कहानी

कल नारी जीवन की एक कहानी सुनी !
उसी की कहानी उसी की जुबानी सुनी !
३० साल जिसने उस घर को संजोने मै लगाया !
आज उसी घर को छोड़ने का उसने मन बनाया !
खटी- मीठी यादे उसे इतने लम्बे समय तक रोके तो रही
पर उसे  बेइंतहा  दर्द  भी देती रही !
सबने अलग अलग ठंग से उसका प्यार तो लिया !
पर उसकी झोली मै तो हर पल दर्द  ही दिया !
घर से निकलते वक़्त भी आंसुओ  ने उसका दामन न छोड़ा !
क्युकी उस वक़्त भी उसे उसी घर का ख्याल आया !
कितना समर्पण है नारी शक्ति मै ,
इतना दर्द आँचल मै समेटे रहती है !
फिर भी  हर पल प्यार बाँटती  फिरती है !
काश इसको कोई समझ सकता !
तो इसका भी दामन खुशियों से भर जाता !

6 comments:

  1. तभी तो कहा गया है………नारी जीवन हाय तुम्हारी यही कहानी, आंचल मे है दूध और आंखो मे पानी।

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  2. बहुत बहुत शुक्रिया दोस्त जो आपने नारी की व्यथा को पड़ा और समझा !

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  3. nari jeevan pe likhna ho to likho yahi,
    aanso peekar ke bhi jisne kuchh na kahi.
    meenakshi ji bahut sahi likha...

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  4. शुक्रिया दोस्त !

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  5. कभी कभी लगता है कि नारी का कोई घर होता ही नहीं
    मायका होता है या ससुराल
    और जब जिसका मन आये बाहर का रास्ता दिखा देता है

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  6. सच कहा आपने दोस्त पता नहीं उसके सही स्थान का पता कब चलेगा ? धन्यवाद दोस्त !

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आपका बहुत - बहुत शुक्रिया जो आप यहाँ आए और अपनी राय दी,हम आपसे आशा करते है की आप आगे भी अपनी राय से हमे अवगत कराते रहेंगे!!
--- संजय सेन सागर

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