Friday, November 12, 2010

बेटियां


कितनी प्यारी होती हैं बेटियां 
हर घर को रोशन बनाती हैं बेटियां 
पापा की भी दुलारी होती हैं बेटियां 
ओस की बूंदों सी नम होती हैं बेटियां 
कली से भी नाजुक होती हैं बेटियां 
सपर्श मै अपनापन ना हो तो रो देती बेटियां 
रोशन करता बेटा तो सिर्फ एक ही कुल को 
दो -दो घरों की लाज निभाती हैं बेटियां 
सारे जहां से प्यारी होती हैं बेटियां 
पलकों मै पली , सांसो मै बसी धरोहर होती हैं बेटियां 
विधि का विधान कहो, या दुनिया की रस्मो को मानो
मुठी मै भरे नीर सी होती हैं बेटियां 
चाहे सांसे थम जाये बाबुल की  ,
हथेली पीली होते ही पराई हो जाती बेटियां !

8 comments:

  1. बिल्कुल सही ,
    एक उम्दा सकारात्मक सोच को दर्शाती कविता।

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  2. सार्थक और सराहनीय प्रस्तुती ..शानदार प्रेरक ब्लोगिंग के लिए आभार
    एक सुकून सा हुआ आपकी कविता पढकर .
    अच्छी रचना.
    बहुत सुन्दर.

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  3. धन्यवाद संजय हमे तुम्हारे जवाब देने का अंदाज़ बहुत पसंद है दोस्त !

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  4. बेहद खूबसूरत भाव्।

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  5. कितनी प्यारी होती बेटिया सुंदर रचना

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  6. शुक्रिया दोस्तों !

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  7. bohot bohot khubsurat rachna... badhaiyan :)

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  8. धन्यवाद दोस्त !

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आपका बहुत - बहुत शुक्रिया जो आप यहाँ आए और अपनी राय दी,हम आपसे आशा करते है की आप आगे भी अपनी राय से हमे अवगत कराते रहेंगे!!
--- संजय सेन सागर

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