Monday, October 25, 2010

मजदुर



बड़े बड़े महलों मै लोगो का बसेरा है !
                  गरीब की मेहनत ने इसे  पिरोया है !
एक २ ईंट की कीमत  खून पसीना है ! 
                ये गरीब तो हर हाल मै  एक नगीना है !
उसकी मेहनत को हर कोई न जाना है !
              उसका  तो आज यहाँ कल कही और ठिकाना है !
पापी पेट है कुच्छ न कुच्छ तो कमाना  है !
                हर इंसा को एक झत दे के निकल जाना  है !
अपनी तमनाओ को दफ़न ही तो ये करते  हैं ! 
                   फिर भी हर हाल मै मुस्कुराते रहते हैं !   
काश हम कुच्छ पल को इनको खुश कर पाते !
                 इनकी मेहनत मै तो जेसे चार चाँद लग जाते !
ये तो बस पल  भर की ही तो ख़ुशी चाहते हैं !
                   और सारी जिंदगी की हमे ख़ुशी दे जाते हैं ! 

4 comments:

  1. हाँ, जिन्दगी एक इन्तिहाँ ही तो है, जिसको पास और फेल होने के चक्कर में इंसान पिसता रहता है. एक इन्तिहाँ पास कर लिया तो दूसरा सामने खुद बा खुद आ जाता है. आख़िर कहाँ तक इन इन्तिहानों से गुजार कर जियें हम. लेकिन ये इंसान की नियति है और इसको देना ही होगा.

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  2. उसकी मेहनत को हर कोई न जाना है !
    उसका तो आज यहाँ कल कही और ठिकाना है !
    पापी पेट है कुच्छ न कुच्छ तो कमाना है !
    हर इंसा को एक झत दे के निकल जाना है !


    bohot bohot khubsurati ke saath... kaafi sanjidagi ke saath piroya hai aapney...

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  3. आदरणीय minakshi pant जी
    नमस्कार !

    कमाल की लेखनी है आपकी लेखनी को नमन बधाई

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  4. मै आप सबका तहेदिल से शुक्रिया करती हु !

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आपका बहुत - बहुत शुक्रिया जो आप यहाँ आए और अपनी राय दी,हम आपसे आशा करते है की आप आगे भी अपनी राय से हमे अवगत कराते रहेंगे!!
--- संजय सेन सागर

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