Saturday, September 25, 2010

फूल


कितनी  प्यारी  कितनी  मोहक 
                     छूने भर से खो दे रोनक 
खुशबु से जग को महकाए 
                      भवरों का भी मन ललचाये 
इंसा के  मन को ये भाये 
                     दुल्हन को भी खूब सजाये 
भगवान के चरणों मै शीश नवाए 
                     हर मोसम मै फिर खिल जाये 
अपने रंगों से जग को महकाए 
                     सारे जग मै  प्यार फैलाये
हर घर - घर की है ये शान 
                    सब करते हैं इसका मान 
कितनी प्यारी कितनी मोहक 
                    छूने भर से खो दे रोनक !  

3 comments:

  1. हर घर - घर की है ये शान
    सब करते हैं इसका मान
    कितनी प्यारी कितनी मोहक
    छूने भर से खो दे रोनक

    इन पंक्तियों ने दिल छू लिया... बहुत सुंदर ....रचना....

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  2. वह इतनी जल्दी जवाब देख कर मुझे बहुत ख़ुशी हुई धन्यवाद दोस्त !

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आपका बहुत - बहुत शुक्रिया जो आप यहाँ आए और अपनी राय दी,हम आपसे आशा करते है की आप आगे भी अपनी राय से हमे अवगत कराते रहेंगे!!
--- संजय सेन सागर