Tuesday, September 28, 2010

कैसे हो दोस्तों,मैं बापिस आ गया.

नमस्कार दोस्तों,कुछ दिनों के अंतराल के बाद आज फिर हाजिर हूँ आप लोगों के बीच,मत पूछिए कितना कशमश भरा रहा यह सारा दिल्ली और शिमला का सफ़र. दिल्ली में खेलों के आयोजन ने रिक्शा और ऑटो ड्राईवर की रोजी रोटी प्रभावित कर दी है तो उन्ही के दर्द के साथ दिल्ली से बापसी हुई,मोहल्ला लाइव का बहसतलब भी मजेदार और सार्थक रहा,इसके बाद शिमला ने थोडा सुकून दिया.
लेकिन चैन तो सागर बापिस आकर ही मिला,तो दोस्तों आजसे फिर शुरुआत करता हूँ हिन्दुस्तान के दर्द की....

संजय सेन सागर 
जय हिन्दुस्तान -जय यंगिस्तान 

1 comment:

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--- संजय सेन सागर

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