Tuesday, August 17, 2010

आँखों से तेरी सूरत जाती नहीं है॥


प्रतिमा तुम्हारे प्यार की भूलती नहीं है॥

आँखों से तेरी सूरत जाती नहीं है॥

हमने भी आँखों को मिलाना भी ,,बंद किया है॥

सुबह शाम छत पे आना भी बंद किया है,

तेरी हंसी की बोल मुरझाती नहीं॥

आँखों से तेरी सूरत जाती नहीं है॥

कई दिनों तक खाना पानी हरम था॥

हमें पता है हमें लवेरिया बुखार था॥

बिना देखे तोहे अंखिया मुस्काती नहीं॥

आँखों से तेरी सूरत जाती नहीं है॥

मेरी ख़ुशी है रूठी मै खोजती तुम्हे हूँ॥

आ जाओ मेरे करीब मै तो यहाँ हूँ॥

तेरे सिवा किसी को बसाया नहीं है...

आँखों से तेरी सूरत जाती नहीं है॥

4 comments:

  1. ankho se surat dil meyn uttaro
    tumeh wah milega jise chahtey ho
    khuseyon ko darde jigar se milao
    tumeh wah dikhega jise chatey ho.
    dua hai hamare tumeh tumko pa le
    samunra se jakrke moti utthae le.

    vishnu kant mishra lucknow. e-mail. vkacao@gmail.com

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  2. शायरी निखर आती थोड़ी और बेहतर,
    इधर उधर तुकबंदी गर जाती नहीं.

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  3. बहुत् सुंदर जी, धन्यवाद

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आपका बहुत - बहुत शुक्रिया जो आप यहाँ आए और अपनी राय दी,हम आपसे आशा करते है की आप आगे भी अपनी राय से हमे अवगत कराते रहेंगे!!
--- संजय सेन सागर

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