Monday, August 16, 2010

मै भी बिका दहेज़ में॥ ससुर बुलाया है॥

मै भी बिका दहेज़ में॥ ससुर बुलाया है॥
उनकी लड़की बड़ी होशियार है ,,
ये भी बताया है...
कहने लगे की बेटा ,,अभी कच्ची कली है॥
अप्सराओ से भी सुन्दर हमारी लली है॥
उसके अनेको काम को मुझको दिखाया है॥
मै भी बिका दहेज़ में॥ ससुर बुलाया है॥
बात सुनती नहीं किसी की न सम्मान करती है॥
बेतुकी बात करती हरदम अकड़ती है॥
उसके दिलेरी बात को फिर से सुनाया है॥
मै भी बिका दहेज़ में॥ ससुर बुलाया है॥
पढ़ाई में मन नहीं लगाई तभी तो दसवी पास है...
बहुत धन दू गा मै तुमको जो हमारे साथ है॥
अपने सपनों को अपने हाथो से सजाया है॥
मै भी बिका दहेज़ में॥ ससुर बुलाया है॥
मेरे घर वाले सब खुश थे॥ हमें आभास हो रहा था॥
इस चक्कर में मत फसो मेरे कान में कह रहा था॥
लालच में मै भी आके अपने भविष्य को डुबाया॥
मै भी बिका दहेज़ में॥ ससुर बुलाया है॥

5 comments:

  1. मै भी बिका दहेज़ में॥ ससुर बुलाया है॥

    बहुत खूब !
    बेहद प्रभावशाली पोस्ट !
    samay हो तो अवश्य पढ़ें:

    पंद्रह अगस्त यानी किसानों के माथे पर पुलिस का डंडा
    http://hamzabaan.blogspot.com/2010/08/blog-post_15.html

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  2. लालच में मै भी आके अपने भविष्य को डुबाया॥

    बहुत अच्छे

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  3. सार्थक प्रस्तुति- साधुवाद!
    सद्भावी -डॉ० डंडा लखनवी

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  4. samast jano ko hardik dhanyavaad...

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आपका बहुत - बहुत शुक्रिया जो आप यहाँ आए और अपनी राय दी,हम आपसे आशा करते है की आप आगे भी अपनी राय से हमे अवगत कराते रहेंगे!!
--- संजय सेन सागर

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