Friday, August 13, 2010

ये है 'पीपली लाइव' बनने की कहानी

नई दिल्ली. आमिर खान की फिल्म ‘पीपली लाइव’ कैसी है, यह तो आप देखने के बाद बताएंगे। पर हम आपको बता रहे हैं, इसके कॉन्‍सेप्‍ट से लेकर पर्दे पर आने तक की कहानी।

फिल्म का आइडिया
फिल्म की डायरेक्टर अनुषा रिज़वी को करीब छह साल पहले किसानों की हालत पर एक फिल्म बनाने का आइडिया तब आया जब 2004 में सरकार ने कुछ किसानों को फसल बर्बाद होने पर मुआवजा दिया था। अनुषा के दिमाग में ‘पीपली लाइव’ की धुंधली तस्वीरें तभी बनने लगी थीं। किसानों के गरीबी से तंग आकर आत्महत्या की खबरें अनुषा की कहानी का आधार बनीं। फिल्म की सिनॉप्सिस और आइडिया तैयार करने के बाद अनुषा ने फिल्म पर पैसा लगाने के लिए प्रोड्यूसरों की तलाश शुरू की। यह तलाश इतनी आसान नहीं थी। लेकिन अनुषा ने आमिर खान का ईमेल तलाशकर उन्हें फिल्म का शुरुआती आइडिया ईमेल किया। सब्जेक्ट लाइन में उन्होंने लिखा ‘द फॉलिंग’  दरअसल, अनुषा ने तब फिल्म का नाम यही सोचा था।

शुरू में पीपली लाइव लगी थी मजाक!
आमिर खान को यह ईमेल द राइजिंग मंगल पांडे की शूटिंग के दौरान मिला। बकौल आमिर उन्हें ईमेल का सब्जेक्ट ‘द फॉलिंग’ थोड़ा दिलचस्प लगा। लेकिन ईमेल पढ़ने पर उन्हें लगा कि उनके साथ किसी ने मजाक किया है  और आमिर खान ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। शुरुआती नाकामी के बावजूद अनुषा ने आमिर को कई ईमेल किए। आमिर को जब पता चला कि अनुषा एक पत्रकार हैं और एनडीटीवी से जुड़ी हुई हैं, तो उन्होंने अनुषा को गंभीरता से लेना शुरू किया। आमिर कहते हैं, ‘ मुझे फिल्म की कहानी काफी फनी, तेज़ गति वाली और संवेदनशील लगी।’

फिल्म की कहानी पर काम
आमिर ने अनुषा से फिल्म की कहानी पर और काम करने और स्क्रिप्ट तैयार करने को कहा। अनुषा ने करीब दस महीने की मेहनत के बाद फिल्म की कहानी अपने पति महमूद फारुकी के साथ मिलकर लिख डाली। राकेश ओमप्रकाश मेहरा की फिल्म ‘रंग दे बसंती’ की शूटिंग के दौरान जब आमिर खान दिल्ली आए तो उन्होंने अनुषा को फिल्म की कहानी और स्क्रिप्ट सुनाने के लिए बुलाया। अनुषा ने फिल्म की कहानी आमिर खान को सुनाई। कहानी आमिर खान को बहुत पसंद आई। बॉलीवुड के ‘मिस्टर परफेक्नशिस्ट’ माने जाने वाले आमिर खाने के मुताबिक फिल्म में पैसा लगाने से पहले उन्होंने अनुषा को कुछ सीन शूट करने के लिए कहा। फिर आमिर ने कुछ सीन शूट कर दिखाने को कहा। अनुषा ने मुंबई में यह शूटिंग कर डीवीडी आमिर को भेजी।  आमिर खान के मुताबिक उन्हें लगा कि काग़ज़ पर लिखी गई कहानी में जो भाव हैं, वही कैमरे पर भी आए हैं। उन्होंने अनुषा को फिल्म बनाने के ग्रीन सिग्नल दे दिया।

किरदारों का चयन और नत्था बनते-बनते रह गए आमिर
अनुषा के सामने अगली चुनौती थी फिल्म के किरदारों का चयन। अनुषा चाहती थीं कि आमिर खान फिल्म के मुख्य नायक नत्था का रोल करें। लेकिन आमिर अपनी फिल्मों- ‘गजनी’ और ‘थ्री इडियट्स’ को लेकर काफी व्यस्त थे। ऐसे में तारीखों की समस्या के चलते नत्था के रोल के लिए किसी और की तलाश शुरू हुई। नत्था के चुनाव के लिए भोपाल में स्क्रीन टेस्ट लिया गया और वहीं पीपली लाइव के नत्था यानी ओंकारदास मानिकपुरी को फिल्म के लीड रोल के लिए चुना गया। ओंकार दस सालों से थिएटर से जुड़े हुए हैं। गौरतलब है कि रघुबीर यादव और नसीरूद्दीन शाह के अलावा इस फिल्म में काम कर रहे ज़्यादातर लोगों के लिए यह पहली फिल्म है। फिल्म की डायरेक्टर अनुषा रिज़वी, फिल्म में संगीत देने वाले म्यूजिक बैंड 'इंडियन ओशन' के अलावा फिल्म के ज्यादातर किरदारों के लिए रुपहले पर्दे का यह पहला तजुर्बा है।


शूटिंग इस फिल्म की ज़्यादातर शूटिंग मध्य प्रदेश और गुजरात में हुई है। मध्य प्रदेश के रायसेन जिले के बड़वई में फिल्म की काफी शूटिंग हुई है। इस फिल्म की शूटिंग करीब 64 दिनों में पूरी हो गई थी। चूंकि, फिल्म में स्टार नहीं थे, इसलिए तारीखों की बहुत समस्या नहीं थी। यही वजह है कि शूटिंग में कम समय लगा, जिसका सीधा असर फिल्म के बजट पर पड़ा।


बिना मेकअप के बनी फिल्म!
फिल्म की डायरेक्टर अनुषा के दिमाग में शूटिंग के दौरान यह बात साफ थी कि उन्हें फिल्म को वास्तविक ज़िंदगी से जोड़ना है ताकि फिल्म आम ज़िंदगी से पूरी तरह से जुड़ी हुई लगे। यही वजह है कि मध्य प्रदेश के बड़वई में शूटिंग के दौरान अनुषा ने गांववालों को अपनी फिल्म का हिस्सा बनाया। फिल्म में गांव की रोजमर्रा की ज़िंदगी को भी शूट किया गया है। अनुषा ने फिल्म में किसी एक्स्ट्रा का सहारा नहीं लिया है। उनकी जगह गांवावालों को लिया गया ताकि फिल्म वास्तविक लगे। यही वजह है कि इस फिल्म में कई किरदार आपको बिना किसी मेकअप या तैयारी के दिखेंगे। अनुषा ने बड़वाई गांव में चल रहे स्कूल को भी शूट किया गया। फिल्म से जुड़े लोगों के मुताबिक अगर शूटिंग के दौरान कोई बकरी भी कैमरे के सामने से गुजरती थी तो अनुषा उस सीन को कट नहीं करती थीं और उसे भी फिल्म का हिस्सा बनाया। इससे अनुषा को वास्तविक फिल्म बनाने में मदद मिली।
महंगाई डायन खाए जात...
इस फिल्म के मशहूर हो चुके गाने महंगाई डायन खाए जात... की कहानी भी दिलचस्प है। दरअसल, आमिर खान के मुताबिक, ‘यह गाना फिल्म की कहानी का शुरुआती हिस्सा नहीं था। लेकिन बड़वई में शूटिंग के दौरान उन्होंने एक स्थानीय मंडली को यह गाना गाते हुए सुना और उन्हें यह बहुत पसंद आया। अनुषा ने गाने को शूट कर लिया। उस समय अनुषा को यह आइडिया नहीं था कि यह गाना फिल्म में कहां फिट होगा, लेकन एडिटिंग के दौरान यह गाना फिल्म में अच्छी तरह से फिट हो गया।’ यह गाना मध्य प्रदेश में लोकगीत के रूप में काफी लंबे समय से गाया जा रहा है। फिल्म में गाना गाने वाली मंडली असली गायकों की मंडली है, जिन्हें आमिर खान ने मुंबई बुलाकर करीब 11 लाख रुपये बतौर मेहनताना दिया था। आमिर खान के मुताबिक जब वह फिल्म का म्यूजिक लॉन्च कर रहे थे, उसी समय महंगाई एक बड़ा मुद्दा थी। महंगाई के मुद्दे पर इस गाने को विपक्षी पार्टियां कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार के खिलाफ इस्तेमाल करना चाहती थीं, लेकिन आमिर खान ने गाने के अधिकार देने से मना कर दिया।

फिल्म का बजट
महंगे लोकेशन, बड़े सितारों और तामझाम के बिना बनी पीपली लाइव का कुल बजट करीब 10 करोड़ रुपये है। यह फिल्म देश भर में करीब 600 सिनेमाघरों में रिलीज हो रही है। पहले इसे 150 सिनेमाघरों में रिलीज करने की योजना थी। लेकिन आमिर खान के मुताबिक छोटे शहरों से भी फिल्म को रिलीज करने की मांग आई तो उन्होंने इसे 600 सिनेमाघरों में रिलीज करने का फैसला किया। फिल्म के टीवी राइट्स ही कलर्स चैनल ने करीब दस करोड़ में खरीद लिए हैं। फिल्म ने रिलीज से पहले ही अपना खर्चा निकाल लिया है। 

2 comments:

  1. आशा है पीपली में छत्‍तीसगढ़ akaltara.blogspot.com पर देखना आपको रोचक लगेगा.

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आपका बहुत - बहुत शुक्रिया जो आप यहाँ आए और अपनी राय दी,हम आपसे आशा करते है की आप आगे भी अपनी राय से हमे अवगत कराते रहेंगे!!
--- संजय सेन सागर

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