Thursday, August 5, 2010

नजरो को नसीब खुशिया॥

नजरो को नसीब खुशिया॥
सब जनों को भाये॥
कोई आके हमें बताये ॥
मेरा प्रीतम किधर गया है॥


रूप है सलोना मंद मंद मुस्काते॥
होठो का लाल रंग है चन्दन लगाते॥
मेरा दिल इधर गया है॥ कोई आके हमें बताये..

रस्ते में फूलो की खुशिया बिछाऊगी॥
सखियों संग बैठ के मंगल गीत gaaugi ॥
मुझको पता नहीं है क्या रूप है बनाए॥

मिलते ही बंद पिजड़े में करके ले जाऊगी॥
उन्हें के हाथो से अपनी मांग सज्वाऊगी॥
मेरे ही साथ अब वे प्रेम गीत गाये..

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--- संजय सेन सागर

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