Saturday, July 31, 2010

वैदराज...

औषधिया की पचान इन्हें है॥
वैदराज कहलाते है॥
पर्वत और शिलाओं पर॥
चक्कर बहुत लगाते है॥

जड़ी बूटियों को ढूढ़ के॥
करते उसका उपयोग॥
सामाजिक कार्यो में जुटकर॥
साधा बड़ा है योग॥
हर बिमारी की दवा है रखते॥
रोगों को दूर भगाते है...
औषधिया की पचान इन्हें है॥
वैदराज कहलाते है॥

इनके मस्तक पर छाया रहती॥
धन्वन्तरी घर को आते है...
महाकाल के महामात्र का॥
करना उपयोग सिखाते है॥
कब इसका उपयोग है करना॥
योग विद्द्य सिखलाते है...
औषधिया की पचान इन्हें है॥
वैदराज कहलाते है॥

No comments:

Post a Comment

आपका बहुत - बहुत शुक्रिया जो आप यहाँ आए और अपनी राय दी,हम आपसे आशा करते है की आप आगे भी अपनी राय से हमे अवगत कराते रहेंगे!!
--- संजय सेन सागर

लो क सं घ र्ष !: राजीव यादव की सरकारी हत्या का प्रयास

आजादी के बाद से आज तक के इतिहास में पहली बार भोपाल कारागार से आठ कथित सिमी कार्यकर्ता कैदियों को निकाल कर दस किलोमीटर दूर ईटी  गांव में...