Monday, July 26, 2010

मै सोच रही हूँ खडी खडी..

मै सोच रही खडीखडी तुम पीछे मुड़ के देखोगे॥
हंस करके नज़र मिलाओ गे pयार की बानी बोलेगे॥
पर तुमतो ऐसे शर्माते हो जैसे कोई सर्मौधा फूल॥
धुप लगे तो मुरझा जाते चढ़ जाती है मिटटी धूल॥
मेरी अंखिया मचला रही आँखों से हमें टटोलो गे॥
हंस करके नज़र मिलाओ गे pयार की बानी बोलेगे॥
गूंगे बन के खड़े हुए हो अब तो प्रभू जी बोलो॥
मुख मिष्ठान तिताय न जाए मिसरी अपनी घोलो॥
मेरा उपहार स्वीकार करो अब किस तराजू तोलोगे।
हंस करके नज़र मिलाओ गे pयार की बानी बोलेगे॥
हाथ उठा के स्वागत कर दो हार पिन्हा दो मुझको॥
सात जनम के बंधन में मै बांधू गी तुझको॥
अपने जीवन की सुख सरिता में प्राण प्रिये नहलावोगे॥
हंस करके नज़र मिलाओ गे pयार की बानी बोलेगे॥

No comments:

Post a Comment

आपका बहुत - बहुत शुक्रिया जो आप यहाँ आए और अपनी राय दी,हम आपसे आशा करते है की आप आगे भी अपनी राय से हमे अवगत कराते रहेंगे!!
--- संजय सेन सागर

लो क सं घ र्ष !: राजीव यादव की सरकारी हत्या का प्रयास

आजादी के बाद से आज तक के इतिहास में पहली बार भोपाल कारागार से आठ कथित सिमी कार्यकर्ता कैदियों को निकाल कर दस किलोमीटर दूर ईटी  गांव में...