Wednesday, July 21, 2010

तुम उपज हमारी हो..




तुम उपज हमारी हो॥तुम्हे बहलाऊगी॥


तेल मालिश करके तुम्हे नहलऊगी॥


समय आने पर मेरे बेटे वह बात बताऊगी॥


जिस दिशा की सच्ची लय हो॥


उसी दिशा को जाना है॥


लय प्रलय में मेरे लल्ला ॥


मान नहीं डिगाना है॥


सही समय आने वाला है॥


रचि रचि स्वाद चखौगी॥


तुम उपज हमारी हो॥तुम्हे बहलाऊगी॥


सुभ समय का होगा आना॥


शुभ शुभ बीते गी रात॥


नाम हमारा अमर करोगे॥


शुभ करोगे कार्य ॥


सपना सच मेरे हो जाए॥


मै भी मंगल गाऊगी॥


तुम उपज हमारी हो॥तुम्हे बहलाऊगी॥


दुःख तकलीफ तुम्हे नहीं होगी॥


छुपा के रख लू आँचल में॥


टोना टोटका दूर करूगी॥


माथ सजादू काजल से॥


सद्बुद्धि की गंगा मै तो॥


तेरे लिए ले आऊगी॥


तुम उपज हमारी हो॥तुम्हे बहलाऊगी॥




2 comments:

  1. बाकि सब ठीक है पर फोटो अशलील है

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  2. aap theek kah rahe hai....

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आपका बहुत - बहुत शुक्रिया जो आप यहाँ आए और अपनी राय दी,हम आपसे आशा करते है की आप आगे भी अपनी राय से हमे अवगत कराते रहेंगे!!
--- संजय सेन सागर

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