Thursday, July 15, 2010

महगाई की मार पड़ी जब...यार बहुत मै रोया था..


आफ सेंचुरी पूरी कर गया॥

कभी नहीं कुछ खोया था॥

महगाई की मार पड़ी तो॥

यार बहुत मै रोया था॥

प्यारा पोता हाथ कर बैठा॥

बाबा काजू खाना है॥

आज हमें सारंगी लाओ॥

आज ही हमें बजाना है॥

सारा खाता छान डाला॥

पेटी संदूक टटोला था॥

मेरी हालत देख के पोता॥

मन में बहुत मसोसा॥

क्यों इतनी महगाई आयी॥

टूटे शब्द में बोला॥

सुख सुविधा से दूर रहोगे॥

मै रो के पोते से बोला था॥


शम्भू नाथ

6 comments:

  1. बढ़िया ! महंगे की मार से तो सभी बेहाल हैं ...

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  2. aap sahi kah rahe hai, sir g

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  3. एक दम आज का सच लिखा है जी.

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  4. महंगाई को चाहे कुछ भी कहो डायन या चुड़ैल चाहे कितना भी आंसू बहा ले, कुछ बदलने वाला नहीं है

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  5. thankyou anamika ji and pashyanti ji,,,

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  6. भाईयो एक दीन गेहू को 10000 रू घी को 30000 हजार तेल को 15000 हजार शकर 3000 रू प्रत‍ि कि‍लो ओर पेट्रोल सब्‍जी तो हम लोगो को नासीब भी नही हो गी चोर बइमानो को भष्‍टाचारीयो को मारो देश बाचालो

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--- संजय सेन सागर

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