Friday, July 9, 2010

गाँव की निति..

चक्रौली पुर में २० लोगो का गाँव था । उस गाँव में सारे दबंग थे और एक ही जाति के ही थे॥ उसी गाँव के एक संपन्न किस्म का आदमी रहता था जिसका नाम था धीरज बहुत ही शान्ति प्रिये आदमी थे उनके अन्दर भक्ति भाव के अंश थे॥ और तो लोग बड़े अदाबंगे थे उस गाँव के ..लेकिन धीरज उन लोगो के से कम धनवान था फिर भी घर की रोज़ी रोटी चलती थी किसी के यहाँ भीख नहीं मांगना पड़ता था । धीरेअज़ अपने किसानी खेती में मस्त रहता था॥ धीरज के पांच बेटे पैदा हुए और धीरज ने नामकरण के अनुसार पहले का नाम पंचम दुसरे दूजे तीसरे का तीजे चौथे का चरुवा और पांचवे का पंचम रखा॥ बच्चे धीरे बड़ा होने लगा पंचम ने बच्चो को गाँव के रहन सहन से दूर रखा क्यों की पंचम का गांव से थोड़ा हट के था ॥ बच्चे पढ़ने में मस्त थे और वह दिन भी गया नौकरी करने लगे अब पंचम ने बहुत ही सुन्दर घर बनवाया जिसमे उसकी पांच बहुए रहेगी ,, पंचम यही बात सब से कहता था । अब गाँव के जो दबंग लोग थे॥ पंचम से जलने लगे ॥ पंचम का एक पडोसी था गाँव के दबंग लोग उसके कान भरने लगे की एबे पंचम तोहरा तो जमीनिया हड़प लहे है ॥ ओहमा आधा हिसा ली ले हम लोग तोहरे साथे है॥ आखिकार पंचम और पंचम के पडोसी में आये दिन तू मै मै होने लगी ॥ धीरे धीरे कई महीने बीत गए दिवाली का दिन था पंचम के पांचो बेटे शहर से घर पर आये थे और पडोसी के भी दोनों बेटे गाँव आये थे ,गाँव में उल्लास था गाँव एबी लोग मस्त होके पडोशी के घर पर आ के पडोसी से कहते है ॥ अब तोहे दुई लरिका आ गए है॥ फैसल्वा करवाय लिया यह बार ॥ पडोसी के बच्चे भी बोले हम उनसे कम थोड़े है ॥ देख लेगे ॥ इतने गाँव के लोग पंचम को पडोसी के घर से गलिया देने लगे पंचम के बच्चो ने पूछा अरे भाई क्यों गाली दे रहे तभी पंचम ने बोला चुप रहो इन लोगो का रोज़ का काम है हमें गाली देते है ॥ आज दिवाली है चलो घर के अन्दर तभी धाय की आवाज़ आती पंचम के सीने में गोली लग जाती सारे बच्चो पंचम को अस्पताल ले जाने के कोशिश कर ही रहे थे की पडोसी के यहाँ दो गोली दागने की आवाज लेकिन दिवाली का दिन था चारो तरफ से धाय धाय की आवाज़ आ रही थी पंचम को बच्चे अस्पताल ले गए । अब पडोसी के गाँव के १५ लोगो का तांता था बोले पंचम के पांचो लड़को ने इन बाप बेटो को मार डाला अब जो पंकज का पडोसी का एक बेटा बचा था वह भी कहने लगा ही इन्ही लोगो ने मारा होगा अकडू ने पंचम पर गोली चाल्या और पंचम मर गया लेकिन पंचम के बेटे तो उसे अस्पताल लेके चले गए॥ अब उस इमान दार आदमी को गाँव वालो पर सक हुआ लेकिन वह स्थिति को समझ कर कुछ नहीं कह सका गाँव के दबंगों के कहने पर वह पंचम के घर में आग भी लगा दिया क्यों की घर पक्का था इस लिए कम नुकशान हुया अब ॥ अब आंव के दबंगों के साथ वह इमानदार इंसान भी थाने में जा कर रिपोर्ट लिखवा दिया की पंचम के पांचो लड़को ने मेरे पिटा जी और भाई को गोली मार दिया वह तो मुझे भी मारना जा रहता थी लेकिन तब तक पंचम वहा गया और वह गोली घूम करके पंचम पर लगी जो पंचम को अस्पताल ले गए है॥ अब तो पुलिस भी अपने दल के साथ गाँव गयी और लाश का मुयायना किया ..अब पंचम के पांचो पुत्रो को पुलिस जेल में दाल दिया इसी शोक में पंचम अस्पताल में ही जा बसा सुरधाम ॥ ये पांचो लडके जेल में पडोसी का जो एक लड़का बचा था जो एक इमानदार था ॥ वह अपना दिमाग दौडाता और अपनी नौकरी करता था ॥ वही उसकी एक लड़की से दोस्ती थी जो शादी शुदा थी । एक दिन बात दोनों बैठ करके चाय पी रहे थे॥ तो वह लड़की बोली..(यह शादी शुदा है । लेकिन मै इसे लड़की इस लिए लिख रहा हूँ। की अभी इसका गौना नहीं गया है । यह भी गाँव की है॥ वह उस ईमान दार आदकी की मामा की लड़की है॥ आप अपने सदमे से उभर कर भाहर आइये आप को बहुत कुछ करना है। आप को अपने बाप और अपने भी के अपराधियों को सजा दिलवाना है॥ हां चार दिन बाद फैसला है तुम मेरे साथ चलना गाँव चलेगे वैसे दोनों लोग समयानुसार कोर्ट में चलेगे॥ ठीक है। जब वे लोग गाँव जाते है तो देखते है। की गाँव के दबंग लोग यहाँ पर गाय भैस भंधाना शुरू कर दिए है , दोनों घरो के दरवाजे टूटे पड़े पंचम के घर का और ईमान दार आदमी के घर का ..एमाना दार आदमी का नाम था इंसान ॥ अब वह उस अपने मामा के लड़की को बताने लगा की ये गाँव वालो की सलाह के द्वारा ही दोनों परिवार में फूट पड़ी है॥ इस गाँव के बाहूबली नहीं चाहते की हम लोग उन्नति करे ॥ उन्ही लोगो के कारण की आज पंचम दादा के पांचो लडके जेल में है॥ न तो उन लोगो ने ने हमारे भाई और बाप को गोली मारे और न ही हम लोगो ने पंचम दादा को गोली मारे है ,,हमें बहुत अच्छी तरह याद है। की ..दिवाली का दिन था शाम का समय था लोग अपने घरो खेतो बाग़ हर एक जगह नदी तालाव तक भी दीप जलाए जा रहे थे तभी हमारे घर गाँव के दस लोग हमारे घर पर आये मेरे पिता जी से कहते हुए बोले की आज तो तुम्हारे दोनों बेटे भी है। और पंचाम्वा के भी हो जाने दो॥ तब कुछ लोगो ने हमारे दरवाज़े से पंचम दादा को गाली देने लगे॥ पंचम दादा कहते हुए बोले अरे आज तो बवाल मत करो आज दिवाली है , भाई..तभी अकडू ने गोली चला जिससे पंचम दादा घायल हो गए॥ और भगदड़ मच गयी॥ मै भी सुरक्षित होने की कोशिस करने लगा तभी हमारे घर धाय धाय की आवाज़ और बाबू भैया की चीत्कार भी॥ हां जब मै दौड़ा तो भगदू और झगरू असलहा फेक रहे थी पंचम दादा के अहाता में॥ जिस कपडे से साफ़ करके फेके थी वह कप्का मै भी छुपा के रखा हूँ। मझे पता है पंचम दादा के पांचो लडके बहुत ही सरीफ है॥ वे लोगो ने टी बिना वजह के जेल की तोतिया खा रहे है । ठीक है ॥ लड़की कहती है की कल कोर्ट में हम लोग साड़ी बाते बता देगे की ये पांचो भाई सरीफ है ॥ हां शोमिया आप ठीक कहते है नहीं तो उन पांचो लोगो को सजा हो जायेगी ॥ ठीक है। अब दुसरे दिन सोम्या और शरीफ इंसान कोर्ट में बताते है । की हमारे पिता जी और हमारे भाई और पंचम दादा को हमारे गाँव के पांच दबंगों ने गोली मारी है । उन पांचो सारीफ आदमियों को छो डी दिया जाए और इन पांचो दबंगों को बंद कर दिया जाये॥ मुझे भी ये लोग गोली मारने के चक्कर में थे लेकिन मै तो रात को ही शहर भाग गया था॥ मै वह भी सबूत दे सकता हूँ। इतना ही नहीं ये लोग हमारे और पंचम दादा के घरो के सारे सामान हड़प ले गए है॥ गाँव के पांचो दबंगों को पुलिस पकड़ के जेल में बंद कर देती है और इन पांचो भाइयो को छोड़ देती है...

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--- संजय सेन सागर

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