Wednesday, June 30, 2010

लो क सं घ र्ष !: पायल के ग़मों का इल्म नहीं झंकार की बातें करते हैं

समस्त प्राणियों में केवल मानव ही अकेला वह प्राणी है जिसमें ऊपर जाने और नीचे गिरने की असीमित संभावनायें छुपी हैं, वही देवता भी है और दानव भी।
हम यहाँ महिलाओं बात करेंगे- अनेक ऐसे क्षेत्र हैं जिनमें वे पुरूषों से बहुत आगे हैं- उन्हों नें प्रगति के प्रकाश-स्तम्भ स्थापित किये हैं, परन्तु गिरावट में भी वे किसी से पीछे नहीं।
इस सबंध में जिनेवा के अंतरराष्ट्रीय अध्ययन संस्थान की एक रिर्पोट यह बताती है कि अपराध की अंधेरी दुनिया में भी महिलाओं का दबदबा बढ़ रहा है। इस अंतरराष्ट्रीय अध्ययन के मुताबिक़ दुनिया भर में महिला गैंगस्टर की संख्या बढ़ कर छः लाख साठ हजार हो गई है। ब्रिटेन और अमेरिका में होने वाले सगंठित अपराधों में तो महिलाओं की हिस्सेदारी 25 से 50 फीसदी तक है।
हम महिला शकिृकरण की बातें करते हैं- देखिये यहाँ पर भी उसने शक्ति का प्रर्दशन किया है, यह और बात है कि परमाणु-बम बनाने के मामले में जैसे एक वैज्ञानिक नें अपनी बुद्धि का दुरूपयोग किया था, वैसे ही यहाँ शक्ति की दुरूपयोग हुआ है।
कहते हैं महिलाओं के आगे बढ़ाने और नीचे गिराने में पुरूषों का अकसर प्रत्यक्ष या परोक्ष हाथ होता है। इस हेतु रिपोर्ट के आगे के शब्दों पर ध्यान दीजियें- अध्ययन में न्यूयार्क के लैटिन क्वींस गिरोह का उदाहरण देते हुए बताया गया है कि कैसे पारिवारिक और यौन हिंसा क वजह से महिलाएं अपराध की दुनिया में घुसी ?
उक्त के आधार पर अब दो बातों पर ग़ौर कीजिये- पहली यह कि पूरी दुनिया में पाश्चात्य देश यह ढ़िंढ़ोरा पीटते हैं कि उनके यहाँ की महिलाओं को अन्य देशों की अपेक्षा अधिक स्वंतत्रता और अधिकार प्राप्त हैं- अब ऐसी स्वतंत्रता से क्या हासिल जिससे वे अपराधी बनें ?
दूसरी बात यह है कि उनके अपराध पुरूषों की क्रूरता की प्रतिक्रियाये हैं। प्रतिक्रिया में भी दुख छिपा होता है।
वहाँ का पुरूष अपने स्वार्थ में महिला को स्वतंत्रता का रंगीन स्वप्न दिखा कर क्लबों तक खींच लाता है, वह उसे खेल-वस्तु समझता है तथा कपड़ो की तरह बदलता है- अन्यथा वह उसे इतना मजबूर बना देता है कि या तो वह अपराधी बनती है या अपने को बाज़ार में बेचने पर विवश हो जाती है। जब वह एक पुरूष से पीछा छुड़ाती है तो दूसरा पुरूष हमदर्दी का मुखौटा लगा कर शोषण हेतु उसके द्वार पर जाकर खड़ा हो जाता है- महिला के अंर्तमन की टीस और दर्द को कोई नहीं समझता। पुरूष एवँ महिला की मानसिकता को ‘शकील‘ ने चित्रित किया है:-
यह इश्को-हवस के दीवाने बेकार की बातें करते हैं
पायल के ग़मों का इल्म नहीं झंकार की बातें करते हैं।

डॉक्टर एस.एम हैदर
फ़ोन : 05248-220866

No comments:

Post a Comment

आपका बहुत - बहुत शुक्रिया जो आप यहाँ आए और अपनी राय दी,हम आपसे आशा करते है की आप आगे भी अपनी राय से हमे अवगत कराते रहेंगे!!
--- संजय सेन सागर

लो क सं घ र्ष !: राजीव यादव की सरकारी हत्या का प्रयास

आजादी के बाद से आज तक के इतिहास में पहली बार भोपाल कारागार से आठ कथित सिमी कार्यकर्ता कैदियों को निकाल कर दस किलोमीटर दूर ईटी  गांव में...