Friday, June 18, 2010

दुल्हा बना सियार..

चूहा आता ढोल बजाते॥
बिल्ली तान लगाती है॥
मेढक बाबा फुदक चलते॥
छू छु गीत सुनाती है॥
कुत्ता बाबू भौ भौ करके॥
डांस खूब दिखाते है॥
बगुला भगत भीत खटिया पर॥
खूब मिठाई खाते है॥
दुल्हा बना सियार है आता॥
संग जंगल की मोढी है॥
झम झम पायल बाजे झींगुर के।
सात रंग की घोड़ी है॥
कुआ गीदड़ बने घराती॥
कोयल गारी गाती है॥
उल्लू मामा बन के धूमे॥
टोपी सिर पर भाती है॥
पहुच बरात आयी दरवाजे॥
गदहा हुक्म सुनाता है॥
धोती बांधे भालू दादा॥
दौड़े दौड़े आता है॥
गाजे बाजे जम कर बजते॥
खूब तमाशे चलते है॥
मौसा बन्दर है दुल्हे के॥
खूब चिबिल्ली करते है॥
दुल्हिन बैठी घर में रोती॥
सब सखिया समझाती है॥
दुल्हे की सब करे बडाई॥
दुल्हिन भी मुस्काती है॥
चूहा आता ढोल बजाते॥
बिल्ली तान लगाती है॥

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--- संजय सेन सागर

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