Monday, June 21, 2010

फ़ोकट में मुशिवत आयी..

रात में अचानक करवट बदलते समय नींद टूट गयी, तो मै अपने आप को किसी नदी के किनारे सोता हुआ मह्शूश किया। मै आवाक रह गया की ये सब कैसे हुआ । थोड़ा असमंजस में पड़ने के बाद हमें ध्यान आया की मै तो ग्वालियर से बनारस aअ रहा था हमारे बगल में एक सुन्दर स्कूल की छात्रा बैठी थी। जो की हमें बतायी थी की मै गवालियर में बुआ के यहाँ से आ रही हूँ। और मै बी। ऐ में पद्धति हूँ। अब हमारा सफ़र शुरू हुआ बात चीत कम हो रही थी। और गाडी अपनी रफ़्तार में चल रही थी जब सुबह हुयी जो वह कोमल कन्या ने बोला आप जाओ पहले फ्रेश हो के आ जाओ तो मै जाऊ मै गया फ्रेश हुआ और आया तो वह बोली आने वाले स्टेशन पर गाडी रुकेगी आप अखवार ले आना जल्द ही स्टेशन आया मै अखवार लेने नीचे गया और अखबार लेके जल्द ही वापस आया तो उसने दो काफी लेके शीत पर बैठी मेरा इन्तजार कर रही थी॥ हम दोनों ने काफी अखवार दोनों साथ साथ पढ़ते और पीते थे॥ अब हमारे दोनों में हँसी मज़ाक का दौर शुरू हुआ था॥ हम दोनों आशिक मिजाज के थे लेकिन वह लड़की बिलकुल अप्सरा थी ॥ मै भी अपने स्मार्ट रूख में थे। हम लोगो ने अपना मोबाइल नुम्बर लिया और दिया ॥ पता नहीं क्या होने लगा हम लोग एक दुसरे ने नज़दीक आने लगे और धीरे धीरे स्टेशन समीप आने वाला ही था। अपने अपने सामान लेके हम नीचे उतर आये और मै उसे देखता वह मुझे देखती और यही कहते॥ ""जान अगर तुमे नहीं मिले तो हम नहीं जी पाए गे॥ उअर उसकी आँखों में आन्सुऊ की झरी लग गयी थी। हम और सहन नहीं कर पाए॥ मैंने उसको अपनी और इशारा किया वह मेरी बाहों में आ गयी॥ तबतक पीछे से आवाज़ आती है ॥ सीमा ,, वह दौड़ी भैया भैया कह के और हमारी पहचान करवाने लगी । ये श्रीमान लेखक जी है॥ जो हमें बहुत अच्छे लगते है शायद हम जल्द ही हम लोग शादी कर बैठी । उसका भाई हमें घूर रहा था, शायद यही सोच रहा था की बात आगे बढ़ गयी है॥ तब तक मै भी बोल बैठा भाई साहब क्या मै कोई गलती कर दी है क्या? तब तक मेरी जान ने बोला मै तुमसे पायर करती हूँ मै भी बोल दिया मै तुम्हारे बिना रह नहीं सकता। गनीमत थी की सारे लोग मेरी जान को लेके चले गए मै सोचा गाडी दो घंटे बाद आएगी चलो चलते है प्रतीक्षालय में समय ब्यतीत किया जाएगा। मै भी वहा जाके बैठ गया । करीब आधे घंटे बात एक हम यूवक मेरे पास आया और बगल में बैठ गया। मुझे याद है की वह अपनी रूमाल निकाला इसके बाद मुझे कुछ नहीं पता है जब मेरी आँख खुली तो मै अपने को नहीं के किनारे पाया और शारीर पर कुछ छोटे भी लगी है॥ मेरा सब कुछ गायब था। आगे लिखने का काम कुछ सफलता हासिल करने पर॥

तूने कैसे किया ये घात॥
मुझसे करके प्यार॥
मै कैसे भूल जाऊ॥
तुझे अपना बनाऊ॥
लड़का: हम आयेगे तुम्हारे पास॥
तुम्हे ले जायेगे अपने साथ॥
मै कैसे भूल जाऊ ॥ तुझे अपना बनाऊ॥
मै तो कच्ची कलियाँ॥ माँ बाप की प्यारी गुडिया॥
भैया जी बतमीजी का ॥ करना सजन न माख॥
उसे तुम भूल जाओ ॥ मेरी तुम मांग सजाओ॥

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--- संजय सेन सागर

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