Tuesday, May 25, 2010

लो क सं घ र्ष !: देश हित में ....

भारतीय जनता पार्टी अपनी नीति और कार्यक्रम के अनुसार सब कुछ तय करती है राष्ट्र हित में क्योंकि वह एक राष्ट्रवादी पार्टी है और उसकी अपनी राष्ट्र की परिभाषा है भारतीय जनता पार्टी की परिभाषा के अनुसार राष्ट्र किसी भूभाग में बसने वाले लोगों का वह समूह है जो एक पंथ को मानने वाला और उसमें विश्वास रखने वाला है। भारतीय जनता पार्टी इसीलिए भारत को हिन्दू राष्ट्र बनाने के लिए प्रयासरत रहती है और उससे जुड़े हुए सामाजिक और धार्मिक लोग हिन्दू राष्ट्र स्थापित करने का राग अलापते रहते हैं। भारतीय जनता पार्टी के योगी आदित्य नाथ जो गोरखपुर से सांसद हैं कहते नहीं थकते कि वह हिन्दू राष्ट्र स्थापित करने के लिए भारत को फिर विभाजित करने के लिए तत्पर हैं। इसी प्रकार भाजपा से जुड़े हुए तमाम संगठन के लोग भारत भूमि से मुसलमानों को निकालकर हिन्दू राष्ट्र स्थापित करने की घोषणा करते रहते हैं और इस उद्देश्य की प्राप्ति के लिए वह भारत का एक भाग मुसलमानों को देने के पक्ष में हैं। जैसे कि भारत एक देश नहीं भाजपा के लोगों को विरासत में मिली हुई सम्पत्ति हो।

गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भारतीय जनता पार्टी की लाइन पर काफी कुछ काम भी किया। आपराधिक विधि विज्ञान का सिद्धान्त है कि जान लेने के उद्देश्य से हमला करने वालों के विरूद्ध उतनी शक्ति का उपयोग करो जितना अपनी जान बचाने के लिए आवश्यक है, यदि उससे अधिक शक्ति का उपयोग किया जाएगा तो वह खुद हमलावर की श्रेणी में समझा जाएगा। गुजरात में इस सिद्धान्त का खुलकर मज़ाक उड़ाया गया। गोधरा काण्ड में जिनपर हमला किया गया बताया जाता है उन्होंने तो अपनी जान बचाने के लिए शक्ति का प्रयोग किया नहीं, लेकिन उनकी जान के बदले जान लेने का जो खुला नाच पूरे प्रदेश में हुआ वह शर्मनाक था लेकिन मोदी जैसा व्यक्ति उसका पक्षधर बनकर उसे सही बताता रहा है। यही नहीं कि उसने उसे सही करार दिया बल्कि पूरे गुजरात में नरसंहार के प्रायोजक के रूप में अपना किरदार निभाया।

आज एक गलत आदमी ने एक सही बात का समर्थन किया है। सम्भव है कि इस सही काम को समर्थन देने के पीछे उसका अपना कोई छिपा हुआ उद्देश्य हो क्योंकि गलत काम करने वाला जल्दी सही काम को समर्थन नहीं देता, जब तक कि उससे उसको स्वयं कोई लाभ न उठाना हो। फिर भी मोदी द्वारा सरकारों को माओवादियों के साथ संवाद का रास्ता निकालकर मसले को हल करना, बताया जाना उचित है। माओवादी कुछ भी हो हमारे देश का अंग हैं और अगर देश को राष्ट्रवाद के नाम पर तोड़ने वाला पक्षधर माओवादियों से बात करके देश को एक रखने की बात करे, खुशी की बात है। देश हित में राष्ट्रवाद के नाम पर देश को तोड़ने वाला व्यक्ति अगर कोई फैसला लेता है तो वह फैसला अच्छा और सराहनीय है क्योंकि फैसला देश हित में है और देश हित से बड़ा कोई हित नहीं होता।

मोहम्मद शुऐब

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--- संजय सेन सागर

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