Friday, May 28, 2010

लो क सं घ र्ष !: और कुछ लोग भी अफ़साना बना देते हैं

कुछ तो होता हैं मुहब्बत में जुनूं के आसार
और कुछ लोग भी अफ़साना बना देते हैं।

आज कल ‘एलियन्स‘ को लेकर लोग ऊँची उड़ाने भर रहे हैं। जितने मुंह उतनी बातें कुछ जानना चाहते हैं, कुछ कहानियाँ बनाने और सुनाने में मज़ा ले रहे हैं। किसी भी प्रतिकूल स्वभाव वाले को या परदेशी को ‘एलेयिन‘ कह सकते हैं। लेकिन जब से इस मामले में विख्यात वैज्ञिानिक स्टीफन हाकिंस ने दख़ल दिया है, कल्पनावादियों को अपनी बातों को साबित करने का वैज्ञानिक आधार हाथ लग गया है।
हाकिंस ने तो केवल इतना कहा कि पृथ्वी से बाहर श्रभी जीवन मौजूद है। परन्तु हम को उनसे सम्पर्क के अभियान नही चलाना चाहिये। इतनी सी बात पर समाचार छपने शुरू हुए। एक उड़ान तश्तरी विशेषज्ञ जर्मनी के हार्टविग हासडार्फ ने तो एक किताब ही लिख दी जिसमें से दावा भी कर बैठे कि अमेरिका अतंरिक्ष एजेन्सी ‘नासा के एक अंतरिक्ष-यान का दूसरे ग्रह के प्राणियोें ने अपहरण कर लिया है।
आप जानते हैं मनुष्य जाति दो भागों-बुद्धि-प्रधान एवं भावना प्रधान में विभाजित हैं। हम बहुत समय से ये दुआ करते रहे हैं ‘तमसो या ज्योर्तिगमय‘ परन्तु यह अभी तक पूरी नहीं हुई, क्योंकि भावनाओं में बहने वालों की संख्या अब भी बहुत हैं। यही वह लोग हैं जिनको रहस्य व रोमांच में मज़ा आता है, यही ‘मुँहनोचवा‘ जैसी अफ़वाहों मे पंख लगते हैं। यही भूत-प्रेत, चुड़ैल, जिन, शैतान की कहानियाँ गढ़ते और सुनाते हैं। यही तंत्र-मंत्र, दुआ तावीज़ करने वालों के चक्कर में फंसते हैं।
चाँद एँव मंगल पर अनुसनंधान हेतु अनेक देशों नें बड़े-बड़े अंतरिक्ष अभियान चला रक्खे हैं, परन्तु अब भी उन पर सुक्ष्म जीवों के अस्तित्व की संभावना की चांच तक हम नहीं पहुँच सके हैं। यहाँ तक कि हम अभी यह भी सुनिश्चित नहीं कर पाये हैं कि वहाँ पानी है भी या भी नहीं ? पिछले ज़माने में अगर काल्पनिक उड़ानों में लोग तल्लीन थे, वे दास्ताने अमीर हमज़ा, क़सानये आज़ाद तथा चन्द्रकांता की कहानियों में विश्वास करते थे तब कोई हर्ज नहीं था परन्तु अब इस विज्ञान के युग में यदि लोग उसी स्तर पर रहें तो आश्चर्य की बात ज़रूर है।
अन्त में हम आपका थोड़ा सा ध्यान मोड़ते हैं। शायरी के क्षेत्र में कल्पना एँव अतिश्योक्रि चल सकती है, परन्तु सुपर अतिश्योक्रि कि लिये ‘पदमावत‘ में जायसी का एक दोहा देखिये ये मान्यता है युद्ध में इतनी धूल उड़ी कि पृथ्वी छै रह गई, आसमान आठ हो गये- सत खंड धरती भई खंडा-ऊपर अष्ट भए ब्रम्हांड।


-डा0 एस0एस0 हैदर

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--- संजय सेन सागर

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