Saturday, May 29, 2010

पुदीने वाली चटनी लेके जाना॥


पुदीने वाली चटनी लेके जाना॥

ऊ चटनी मोरी सासू को देना॥

चाखत चटनिया भरय हर्जाना..पुदीने वाली चटनी लेके जाना॥

ऊ चटनी मोरी ननदी को देना॥

चाखत चटनिया लगावे निशाना॥

पुदीने वाली चटनी लेके जाना॥

ऊ चटनी मोरी ससुर जी देना॥

चाखत चटनिया लुटे खजाना॥

पुदीने वाली चटनी लेके जाना॥

ऊ चटनी मोरे जयेष्ट जी देना॥

चाखत चटनिया खोले पायजामा॥

पुदीने वाली चटनी लेके जाना॥

ऊ चटनी मोरे सिया जी को देना॥

चाखत चटनिया कराय हंगामा॥

पुदीने वाली चटनी लेके जाना॥

4 comments:

  1. bahut khub...
    achha kavya bana gaya hai...

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  2. aur haan mere blog par...
    तुम आओ तो चिराग रौशन हों.......
    regards
    http://i555.blogspot.com/
    puraani rachnaayein bhi jaroor padhein...

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  3. किसी देश की सांस्कृतिक विरासत को परखना हो तो वहाँ के लोक गीतों में झाँको। लोक गीतों में देश की आत्मा बसती है। आपके द्वारा प्रस्तुत लोक गीत को पढकर सुखद अनुभूति हुई। बधाई।
    सद्भावी-डॉ० डंडा लखनवी

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  4. aap sabhee logo ko jo hamare hamura hai unako sadar namaskaar aur jo hamare pita tuly ya dada tulya hai un logo ko sadar charan sparsh...

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आपका बहुत - बहुत शुक्रिया जो आप यहाँ आए और अपनी राय दी,हम आपसे आशा करते है की आप आगे भी अपनी राय से हमे अवगत कराते रहेंगे!!
--- संजय सेन सागर

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