Saturday, May 8, 2010

गीत : भारतीय जो... ---संजीव 'सलिल'


गीत :
संजीव 'सलिल'
भारतीय जो उसको भारत माता की जय कहना होगा.
सर्व धर्म समभाव मानकर, स्नेह सहित मिल रहना होगा...
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आरक्षण की राजनीति है त्याज्य करें उन्मूलन मिलकर.
कमल योग्यता का प्रमुदित सौन्दर्य सौंदर्य बिखेरे सर में खिलकर.
नेह नर्मदा निर्मल रहे प्रवाहित हर भारतवासी में-
द्वेष-घृणा के पाषाणों को सिकता बनकर बहना होगा..
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जाति धर्म भू भाषा भूषा, अंतर में अंतर उपजाते.
भारतीय भारत माता का दस दिश में जयकार गुंजाते.
पूज्य न हो यह भारत जिसको उसे गले से लगा न पाते-
गैर न कोई सब अपने हैं, सबको हँसकर सहना होगा...
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कंकर-कंकर में शंकर हैं, गद्दारों हित प्रलयंकर हैं.
देश हेती हँस शीश कटाएँ, रण में अरि को अभ्यंकर हैं.
फूट हुई तो पद्मिनियों को फिर जौहर में दहना होगा...
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3 comments:

  1. जय श्री कृष्ण...आपके ब्लॉग पर आ कर बहुत अच्छा लगा...बहुत अच्छा लिखा हैं आपने.....भावपूर्ण...सार्थक

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  2. bahut su-vicharon se bhari aapki rachna aapas mein miljulkar rahne aur deshprem ki bhawana ka alaw jaga rahi hai..
    Nav chetna jagane ke disha mein saarthak pryas ke liye abhar...

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  3. देश और समाज में भाई चारा,सहजीवन,संप्रदायिक सौहार्द्र की भावना को परवान चढाती कविता। आभार!

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आपका बहुत - बहुत शुक्रिया जो आप यहाँ आए और अपनी राय दी,हम आपसे आशा करते है की आप आगे भी अपनी राय से हमे अवगत कराते रहेंगे!!
--- संजय सेन सागर

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