Saturday, April 10, 2010

लीला किये महेश...

जब मौत बनी दासी हमारी॥
हम उसके हुए अधीन॥
धमा चौकड़ी भूल गए सब॥
न बहकी विपरीत॥
ठाठ बात सब बना रहे॥
मिट गा आज क्लेश॥
नभ से पुष्प बरषा हुयी॥
लीला किये महेश॥

2 comments:

  1. काबिलेतारीफ है प्रस्तुति।.सारी रचनाये आपकी बहुत ही अच्छी है|

    ReplyDelete

आपका बहुत - बहुत शुक्रिया जो आप यहाँ आए और अपनी राय दी,हम आपसे आशा करते है की आप आगे भी अपनी राय से हमे अवगत कराते रहेंगे!!
--- संजय सेन सागर

लो क सं घ र्ष !: राजीव यादव की सरकारी हत्या का प्रयास

आजादी के बाद से आज तक के इतिहास में पहली बार भोपाल कारागार से आठ कथित सिमी कार्यकर्ता कैदियों को निकाल कर दस किलोमीटर दूर ईटी  गांव में...