Saturday, March 13, 2010

लडकिया जब दिल तोड़ती है॥

लडकिया जब दिल तोड़ती है॥
क्या अच्छा लगता है॥
रोता है दिल बेचारा॥
नाजुक बच्चा लगता है॥
बोलो क्या अच्छा लगता है,,
खो जाती है सपने सहारे॥
कांटे चुभते राहो में॥
घट जाती है उम्र बेचारी॥
फरक पड़ता है बाहों पे॥
बेवफा का सहारा हमको॥
क्या सच्चा लगता है॥
मिल जाते है जब अकेले॥
काली रात भांदो में॥
तुम भी नशीली हो जाती हो॥
पेड़ोकी उस छाहो में॥
बेदर्दी तेरा स्वाद अब ॥
क्यों खट्टा लगता है॥

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--- संजय सेन सागर

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