Wednesday, February 17, 2010

गम देके चले गए॥

आये थे हमसे मिलने॥
गम देके चले गए॥
खुशिया लगी है हंसने॥
वे मिल के चले गए॥
जाते जाते बता गए॥
फिर ये पल नसीब हो॥
तुम मेरे करीब हो ॥
हम तेरे करीब हो॥
पचपन के ढके छोले का॥
आँचल उड़ा गए॥
आये थे हमसे मिलने॥
गम देके चले गए॥
खुशिया लगी है हंसने॥
वे मिल के चले गए॥
जाते जाते बता गए थे॥
सौभाग्य है हमारा॥
पूनम को पूणिमा को॥
हंसता दिखा नजारा॥
मेरे ही नीर में वे ॥
अमृत मिला गए॥
आये थे हमसे मिलने॥
गम देके चले गए॥
खुशिया लगी है हंसने॥
वे मिल के चले गए॥
जाते जाते बता गए॥
संगम में कैसे मिलना॥
खिलते हुए चमन में॥
फूलो के साथ मिलना॥
मेरी ही घुन में अपनी॥
सरगम मिला गए॥
आये थे हमसे मिलने॥
गम देके चले गए॥
खुशिया लगी है हंसने॥
वे मिल के चले गए॥

2 comments:

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--- संजय सेन सागर

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