Tuesday, February 2, 2010

अब भी कोई संताप नहीं..

हमको उनसे भी कोइ शिकायत नहीं॥
जिसने दिल को मेरे तोड़ के रख दिया॥
दिल हमने दिया ये खता थी मेरी॥
मेरे जीवन के खुशियों में गम भर दिया॥
याद करते है अब याद आयेगे कल॥
मेरी हालत को देख मुस्कराए गे वे॥
कंचन बगिया को मेरी जो गर्द कर दिया॥

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--- संजय सेन सागर

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