Thursday, February 11, 2010

पिछली होली की चोट..

पिछली होली बीत गईल ॥
दे गयी सर पर चोट॥
हाँथ पैर सब टूट गया॥
अफसर मांगे नोट॥
अफसर मांगे नोट॥
शराबी की संज्ञा दे डाली॥
घर में कोई छूता नाही॥
सब को मिल गयी गाली॥
थोड़ी से मै पीकर के दारू॥
जो घटना लिख डाली॥
गया पलंग पर सोय ॥
जिसपर सोयी थी मेरी साली॥
बच गया पजामा फटने से॥
जब पहुची प्यारी घर वाली॥
सुन के हुआ आजीज ॥
वही गुस्से में फाड़ दी॥
दादा वाली कमीज॥
घर से पहुचा सड़क पर॥
कर दीन्हा हंगामा॥
सब कहते थे नया शराबी है॥
करता करीसा ड्रामा॥
बुरी मनी होली हमारी॥
लगी बहुत करोच॥
पिछली होली बीत गईल ॥
दे गयी सर पर चोट॥
हाँथ पैर सब टूट गया॥
अफसर मांगे नोट॥

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--- संजय सेन सागर

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